एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में टर्बुलेंस का हादसा
4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट (Pukhet) से दिल्ली (Delhi) जाने वाली फ्लाइट में अचानक तेज़ टर्बुलेंस का सामना हुआ। इस घटना के कारण लगभग 24 यात्रियों को चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू (Ram Mohan Naidu) ने जानकारी दी कि इनमें से अधिकांश यात्रियों को शुरुआती उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। वहीं, एयर इंडिया के चार क्रू सदस्य अभी भी अस्पताल में हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
मेडिकल सहायता और राहत कार्यों का त्वरित प्रबंधन
मंत्री ने बताया कि घटना के तुरंत बाद ही मेडिकल टीमों ने यात्रियों और क्रू मेंबर्स को आवश्यक सहायता प्रदान की। उन्होंने वसंत कुंज (Vasant Kunj) स्थित फोर्टिस अस्पताल का दौरा किया और फ्लाइट AI2379 के यात्रियों तथा क्रू मेंबर्स का हाल जाना। जांच में पता चला कि आठ यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्य को विस्तृत चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया।
घटना की जांच और भविष्य की सुरक्षा उपाय
राम मोहन नायडू ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों, एयर इंडिया, DGCA (Directorate General of Civil Aviation) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर घटना की समीक्षा की गई। उन्होंने हर दो घंटे में मरीजों की मेडिकल स्थिति की जानकारी देने के निर्देश दिए। साथ ही, DGCA को इस घटना की विस्तृत जांच शुरू करने का आदेश भी दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि DGCA इस घटना की जांच कर रहा है कि फ्लाइट में टर्बुलेंस क्यों आया। जांच की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही पूरी घटना का स्पष्ट विवरण सामने आएगा। DGCA के भीतर अलग-अलग कार्य समूह और समितियां बनाकर सुरक्षा, नेविगेशन और वर्टिपोर्ट जैसे पहलुओं पर काम किया जा रहा है। ये समूह लगातार उद्योग से संवाद कर रहे हैं ताकि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नियामक दिशानिर्देश भी विकसित किए जा सकें।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पश्चिमी देशों के दिशानिर्देशों की नकल नहीं कर रहा है, बल्कि अपनी गति से आगे बढ़ रहा है। देश में हो रहे तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए नए नियम और दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं, ताकि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और नवाचार दोनों का समावेश हो सके।










