संसद में बजट सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव बढ़ा
वर्तमान संसद बजट सत्र में आज फिर से कार्यवाही शुरू हो रही है, जिसमें विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। कांग्रेस नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी ने इस प्रस्ताव के माध्यम से बिरला पर पार्टीबाजी का आरोप लगाया है, साथ ही यह भी कहा है कि उन्होंने विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया है। इस प्रस्ताव का समर्थन पश्चिम बंगाल की रूलिंग पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी किया है, जिसने पहले नोटिस पर हस्ताक्षर करने में हिचकिचाहट दिखाई थी।
अविश्वास प्रस्ताव और स्पीकर हटाने की प्रक्रिया
लोकसभा में 9 मार्च को ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसके लिए विपक्ष ने नियम 94 (C) के तहत नोटिस दिया है। इस प्रक्रिया के तहत, सदस्यों को करीब 14 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक है, ताकि प्रस्ताव पर चर्चा हो सके। यदि प्रस्ताव पर बहुमत से वोटिंग होती है और वह पास हो जाता है, तो स्पीकर को पद से हटाया जा सकता है। इस दौरान, स्पीकर सदन की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता, लेकिन वह चर्चा में हिस्सा ले सकता है और वोट भी दे सकता है।
स्पीकर हटाने की कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा के कुल सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित कर स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाया जा सकता है। इसके लिए, प्रस्ताव लाने से पहले नोटिस देना जरूरी है, जो करीब 14 दिन पहले सेक्रेटरी जनरल को सौंपा जाता है। नोटिस के बाद, प्रस्ताव सदन में लाया जाता है और फिर वोटिंग के माध्यम से निर्णय लिया जाता है। यदि प्रस्ताव समर्थित होता है, तो स्पीकर को पद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में, यदि वोट बराबर हो, तो प्रस्ताव अस्वीकृत माना जाएगा।










