जेएनयू में छात्रसंघ पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का प्रदर्शन
बुधवार को जेएनयू (Jawaharlal Nehru University) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार फिर से विश्वविद्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने पुराने अंदाज में सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों के अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई और विश्वविद्यालय प्रशासन से रस्टिकेट किए गए छात्रों को पुनः बहाल करने की मांग की।
छात्रों के खिलाफ रस्टिकेशन का विवाद और समर्थन
जेएनयू प्रशासन ने छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सहित चार छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट कर दिया है। इनमें जेएनयूएसयू (JNUSU) के अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं। इन छात्रों को विश्वविद्यालय ने ‘आउट ऑफ़ बाउंड्स’ भी घोषित कर दिया है, जिससे वे कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकते। यह कार्रवाई पिछले साल नवंबर में हुई एक घटना के बाद की गई, जब छात्रों ने फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के विरोध में प्रदर्शन किया था।
प्रदर्शन और विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया
प्रदर्शनकारियों ने इस तकनीक को ‘मास सर्विलांस’ करार देते हुए चेतावनी दी कि इससे कैंपस की प्राइवेसी, अकादमिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं। इस विवाद के बीच कन्हैया कुमार ने फिर से अपने पुराने तेवर दिखाए और कहा कि यदि इन छात्रों के खिलाफ आदेश वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके जैसे छात्र नेता और प्रोफेसर इस आंदोलन का समर्थन करेंगे और प्रशासन को आदेश वापस लेने पर मजबूर करेंगे।











