दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों का बदलाव और नई परंपरा
देश की राजधानी दिल्ली न केवल सत्ता के गलियारों के लिए जानी जाती है, बल्कि यहाँ जन-आंदोलनों की आवाज भी प्रभावशाली रूप से गूंजती है। भारतीय लोकतंत्र में सरकार के फैसलों का विरोध करने और अपनी मांगें व्यक्त करने के लिए प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों का लंबा इतिहास रहा है। समय के साथ सुरक्षा कारणों, वीवीआईपी ट्रैफिक और अदालतों के आदेशों के चलते इन प्रदर्शन स्थलों में बदलाव होता रहा है। अब फिर से एक नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रदर्शन स्थलों का स्थान बदल दिया गया है।
प्रदर्शन के पुराने केंद्र और उनका इतिहास
आज़ादी के बाद से अस्सी के दशक तक इंडिया गेट के पास स्थित ‘बोट क्लब’ प्रदर्शन का मुख्य केंद्र था। यह इलाका संसद भवन के नजदीक होने के कारण सत्ता के नाक के नीचे अपनी आवाज पहुंचाने का सबसे प्रभावशाली माध्यम था। अक्टूबर 1988 में भारतीय किसान यूनियन के नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लाखों किसानों ने बोट क्लब पर डेरा डाल दिया था। किसानों ने गन्ने की कीमत बढ़ाने और बिजली-पानी के बिलों में छूट की मांग को लेकर करीब एक हफ्ते तक इस इलाके पर कब्जा किया। इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद सुरक्षा कारणों से केंद्र सरकार ने बोट क्लब पर रैलियों और प्रदर्शनों पर स्थायी रोक लगा दी।
जंतर-मंतर का उदय और प्रदर्शन का नया केंद्र
बोट क्लब पर प्रतिबंध के बाद 1993 में टॉल्स्टॉय मार्ग स्थित जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल घोषित किया गया। अगले तीन दशकों तक यह स्थान देशभर के आंदोलनों का मुख्य केंद्र बना रहा। किसानों के प्रदर्शन, अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन, निर्भया आंदोलन जैसी प्रमुख घटनाएँ इसी स्थल से शुरू हुईं। 2015 में ‘वन रैंक-वन पेंशन’ (OROP) और 2017 में तमिलनाडु के किसानों का प्रदर्शन भी यहीं आयोजित हुआ। हालांकि 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ध्वनि प्रदूषण के कारण यहाँ स्थायी धरनों पर रोक लगा दी, लेकिन सांकेतिक प्रदर्शन जारी रहे।
वर्तमान में, 2023 में ओलंपिक पदक विजेता विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया का महिला पहलवान उत्पीड़न विरोधी धरना, कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन और सोनम वांगचुक का अनशन जैसी प्रमुख घटनाएँ जंतर-मंतर से जुड़ी हैं।
अब सरकार ने तय किया है कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं होंगे। इसके स्थान पर प्रदर्शन के लिए बुराड़ी, रामलीला मैदान और CBD ग्राउंड जैसी नई जगहें निर्धारित की गई हैं। यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जब प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर जाने की मांग की। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति बनाई थी, जिसने इन नई जगहों की सिफारिश की। इस बदलाव का मकसद शहरीकरण और सुरक्षा के मद्देनजर प्रदर्शन के स्थानों में बदलाव लाना है, ताकि जनता की आवाज़ प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।









