पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की चिंता और विदेश मंत्री का बयान
राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया (West Asia) की वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। विशेष रूप से, मिडिल ईस्ट (Middle East) में फंसे भारतीय छात्रों और कामगारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने में भारतीय दूतावास सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि तेहरान (Tehran) में भारतीय दूतावास पूरी तरह से कार्यशील है और उच्च सतर्कता के साथ काम कर रहा है। भारतीय नागरिकों को ईरान से बाहर निकालने के लिए भारत ने आर्मेनिया (Armenia) के रास्ते उनके लौटने में मदद की है। सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय का समर्थन करना और संकट के समय में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वेस्ट एशिया में तनाव और भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने 20 फरवरी को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान खोजने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर करीबी नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी कदम उठा रहे हैं।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए वेस्ट एशिया (West Asia) की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। पड़ोसी देशों के साथ भारत का संबंध मजबूत है और इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जो वहां काम और पढ़ाई कर रहे हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा और हित भारत के लिए अत्यंत जरूरी हैं।
क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव और भारत की जिम्मेदारी
विदेश मंत्री ने बताया कि इस संघर्ष का प्रभाव पूरे क्षेत्र में फैल रहा है और सुरक्षा की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ रही है। हिंसा और अस्थिरता का माहौल बढ़ रहा है, जिससे आम जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है। भारत इस संकट का सामना करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।










