दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिबंध
दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए नागरिकों ने आज इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में आम जनता के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी भाग लिया। लोगों ने सरकार से प्रदूषण नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी नीतियों की मांग की।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इंडिया गेट प्रदर्शन स्थल नहीं है। इसके बजाय, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर जाने का निर्देश दिया और नियमों का उल्लंघन करने पर कई लोगों को हिरासत में भी लिया।
प्रदूषण पर जनता का गुस्सा और स्थायी समाधान की आवश्यकता
एक स्थानीय निवासी ने कहा कि दिल्ली की हवा अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार बढ़ रहा है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भी दबाने का प्रयास कर रही है और लोगों को जबरदस्ती हटा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण से प्रभावित लोग बीमार हो रहे हैं और मर रहे हैं, लेकिन सरकार अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। सरकार प्रदूषण के असली आंकड़ों को छिपाने का प्रयास कर रही है और दिखावे के तौर पर पानी का छिड़काव जैसे अस्थायी उपाय कर रही है। कृत्रिम बारिश यानी क्लाउड सीडिंग भी प्रभावी नहीं साबित हो रही है, जो स्थायी समाधान नहीं है।
आम आदमी पार्टी का आरोप और प्रदूषण का वर्तमान आंकड़ा
वायु प्रदूषण के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इंडिया गेट पहुंचकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन पहली बार बुद्धिजीवी वर्ग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहा है।
उन्होंने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो सरकार जानबूझकर एयर क्वालिटी डेटा छिपा देती है। भारद्वाज ने कहा कि जब भी हवा की गुणवत्ता सबसे खराब होती है, तब AQI डेटा लेना बंद कर दिया जाता है।
अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 1 नवंबर से 8 नवंबर के बीच लगातार बढ़ रहा है, जिसमें 8 नवंबर को यह 361 तक पहुंच गया। इस बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, और वे सरकार से स्थायी और कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।










