दिल्ली-एनसीआर में जलभराव की समस्या का कारण
सोमवार की शाम भारी बारिश के बाद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में जलभराव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इस बारिश ने न केवल दिल्ली के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया, बल्कि गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में भी पानी का प्रकोप देखा गया। खासतौर पर गुरुग्राम में बारिश के बाद सड़कें झील जैसी दिखने लगीं, जिससे यातायात बाधित हो गया। इस स्थिति का मुख्य कारण इन शहरों के ड्रेनेज सिस्टम में मौजूद खामियां हैं, जो भारी बारिश के समय पानी को सही तरीके से निकालने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
नोएडा और गुरुग्राम के ड्रेनेज सिस्टम में फर्क
नोएडा और गुरुग्राम दोनों ही उदारीकरण के बाद विकसित हुए हैं, लेकिन इन दोनों शहरों की जल निकासी व्यवस्था में बड़ा फर्क है। नोएडा ने अपने निर्माण से पहले ही व्यापक नाले और ट्रंक ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण किया, साथ ही यमुना और हिंडन जैसी नदियों से प्राकृतिक आउटफॉल प्राप्त किया। इसके विपरीत, गुरुग्राम में प्राइवेट कॉलोनियों और ऊंची-ऊंची इमारतों के निर्माण के साथ ही पारंपरिक जल निकासी व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां का पानी नजफगढ़ नाले में जाता है, लेकिन अधिकांश नाले अतिक्रमण और बंद हो चुके हैं, जिससे जलभराव की समस्या बढ़ गई है।
प्राकृतिक जल निकासी का कंक्रीट से पाटना और शहर का विकास
गुरुग्राम का भौगोलिक ढांचा प्राकृतिक जल निकासी के लिए अनुकूल था, जिसमें अरावली की पहाड़ियों से नजफगढ़ बेसिन तक प्राकृतिक ढलान मौजूद थी। लेकिन अंधाधुंध शहरीकरण के कारण पारंपरिक तालाब, जोहड़ और प्राकृतिक नाले खत्म हो गए या कंक्रीट में दब गए। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पहले यहां दर्जनों चेक डैम थे, जिनमें से अधिकांश अब गायब हो चुके हैं। इस वजह से मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता खत्म हो गई है, और बारिश का पानी बहकर सड़कों और बंद नालों में जमा हो जाता है।
गुरुग्राम का विकास ‘कटे हुए टापुओं’ की तरह हुआ है, जहां बिल्डरों ने अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर तो ड्रेनेज सिस्टम बना लिए, लेकिन जब पानी बाहर सड़क पर आता है, तो मुख्य नाले या तो बंद हो जाते हैं या गायब हो जाते हैं। इसके अलावा, शहर में जिम्मेदारी तय करने वाली एजेंसियों का तालमेल न होना भी जलभराव की मुख्य वजह है। दिल्ली का द्वारका भी इसी तरह के विकास का शिकार है, जहां भारी सिल्टिंग और अतिक्रमण के कारण मास्टर ड्रेनेज सिस्टम फेल हो गया है।











