दिल्ली-एनसीआर में ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश
दिल्ली और एनसीआर (National Capital Region) के बीच चल रहे एक हाई-प्रोफाइल सिंथेटिक ड्रग रैकेट की परतें उस समय उजागर हुईं जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिल्ली के एक फार्महाउस पर छापा मारा। प्रारंभिक छापेमारी में सामान्य रूप से होने वाली गिरफ्तारी की तरह ही सुराग मिले, जिनसे पता चला कि इस रैकेट ने करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग्स की तस्करी की योजना बनाई थी।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल ड्रग्स की तस्करी का नहीं है, बल्कि एक जटिल और अदृश्य अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा है, जिसे विदेशी ऑपरेटर अपने भारतीय सहयोगियों के माध्यम से रिमोटली नियंत्रित कर रहे थे। इस नेटवर्क का मुख्य केंद्र एक 25 वर्षीय युवक शेन वारिस था, जो खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताता रहा, लेकिन जांच में पता चला कि वह इस रैकेट का विश्वसनीय संचालनकर्ता था।
डिजिटल ट्रेल और विदेशी कनेक्शन का खुलासा
NCB की प्रारंभिक जांच के आधार पर, दिल्ली के जिस फार्महाउस में छापा मारा गया, वहां से तुरंत कोई बड़ा कंसाइनमेंट नहीं मिला, लेकिन एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण डिजिटल ट्रेल मिला। इसमें कुछ नंबर, एन्क्रिप्टेड चैट्स और कोडवर्ड्स शामिल थे, जिनके अर्थ समझने में टीम को दो दिन लगे। इसी डिजिटल फुटप्रिंट ने ऑपरेशन को मजबूत आधार प्रदान किया।
तीसरे दिन, एनसीबी की टीम ने अमरोहा निवासी शेन वारिस को नोएडा के सेक्टर-5 में किराए के चौथे मंजिल वाले फ्लैट से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह ड्रग पैकेट प्राप्त करने और ट्रांसपोर्ट करने का काम करता था, और यह सब अपने बॉस के निर्देशानुसार होता था, जो देश में नहीं था। शेन ने बताया कि वह फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था और व्हाट्सऐप तथा Zangi जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर बातचीत करता था, जिनमें सभी निर्देश कोडवर्ड में होते थे। हर गतिविधि का वीडियो या फोटो बॉस को भेजना जरूरी था, मानो कोई विदेशी वीडियो गेम का रिमोट कंट्रोलर भारत में चल रहा हो।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का खुलासा और आगे की जांच
पूछताछ के दौरान शेन ने एक और नाम का खुलासा किया-एस्थर किनिमी, जो नागालैंड की रहने वाली एक महिला थी और दिल्ली में किराए के फ्लैट में रहती थी। उसने बताया कि एस्थर को पहले भी एक कंसाइनमेंट सौंपा गया था, जिसे बाद में एक राइडर के जरिए आगे भेजा गया। इस जानकारी के आधार पर, एनसीबी ने रात को ही छतरपुर के एक फ्लैट पर छापा मारा, जहां से 328.54 किलो मेथाम्फेटामाइन (Methamphetamine) बरामद हुई। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 262 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
यह ड्रग्स का बड़ा नेटवर्क देश से बाहर संचालित हो रहा था, जिसमें लॉजिस्टिक्स को विभिन्न शहरों से नियंत्रित किया जा रहा था। हर रैकेट सदस्य को केवल अपने हिस्से का ही पता होता था, और भुगतान पूरी तरह डिजिटल और मल्टी-लेयर चैन के माध्यम से होता था। शेन और एस्थर जैसे लोग इस नेटवर्क की फॉरवर्ड यूनिट थे, जो सिर्फ हैंडलिंग और मूवमेंट का काम देखते थे, जबकि असली ऑपरेटर विदेश में बैठा था। अभी तक उसकी पहचान और लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन फोन डेटा, कॉल लॉग और क्लाउड बैकअप से पता चलता है कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा है।
NCB ने इस पूरे मामले में तीन दिनों के भीतर कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, अमरोहा और पंजाब के कुछ क्षेत्र शामिल हैं। जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क में कम से कम सात और लोग सक्रिय हैं, जिनमें से कुछ कूरियर या राइडर के रूप में काम कर रहे हैं, जबकि अन्य किराए के फ्लैट्स का प्रबंधन कर रहे थे। अभी भी विदेशी बॉस की पहचान और फंडिंग चैनल की जांच जारी है।










