NEET UG पेपर लीक विवाद में प्रमुख घटनाक्रम
मई से जुलाई के बीच NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। परीक्षा रद्द होने के बाद जनता में गहरा आक्रोश फैल गया, जिसने जंतर मंतर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन को जन्म दिया। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन ने किया, जिसने हफ्तों तक सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, विपक्ष का संसद और सड़क पर विरोध, और 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई ने इस विवाद को और भी गर्मा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त कानून बनाने का संकेत दिया, जिसके बाद 24 जुलाई को कैबिनेट ने कठोर बिल को मंजूरी दी। इसके अगले ही दिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
शिक्षा मंत्री का स्वीकारोक्ति और आंदोलन का विस्तार
15 मई को खुद धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि NEET परीक्षा का पेपर लीक हुआ है। उन्होंने बताया कि यह गलती एक चूक के कारण हुई, जो परीक्षा संचालन की प्रक्रिया में हुई। इसके बाद 21 जून को परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया। इसी दौरान एक और दिलचस्प घटना हुई। 15 और 16 मई को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी वायरल हुई, जिसमें उन्होंने ‘कॉकरोच’ शब्द का प्रयोग किया था। इस टिप्पणी से प्रेरित होकर अभिजीत दिपके नाम के व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में CJP नामक संगठन बनाया। शुरुआत में यह सिर्फ एक ऑनलाइन मजाक था, लेकिन कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। NEET परीक्षा रद्द होने की खबर के साथ ही यह मंच युवाओं के गुस्से का प्रतीक बन गया।
आंदोलन का उग्र रूप और सरकार का कठोर कदम
जून के महीने में यह आंदोलन और भी तेज हो गया। 6 जून को CJP ने जंतर मंतर पर अपना पहला बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें तीन मुख्य मांगें थीं: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार, और आत्महत्या कर चुके छात्रों के परिवारों को मुआवजा। 20 जून से यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, वे जंतर मंतर नहीं छोड़ेंगे। सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू की, जो 26 दिनों तक चली। इस बीच, प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए और युवा बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर जुटने लगे। 21 जून को NEET की पुनः परीक्षा हुई, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ। जुलाई में यह विवाद और भी उग्र हो गया। 20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च का ऐलान किया, जिसे पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। विपक्षी नेताओं ने भी सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। संसद का मॉनसून सत्र भी इस मुद्दे पर ठप हो गया, क्योंकि विपक्षी सांसद नारेबाजी कर रहे थे और सरकार से इस्तीफे की मांग कर रहे थे। अंततः 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे आंदोलन में एक बड़ा मोड़ आया।











