सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली दंगों के मामले में निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामलों में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके विपरीत, इस केस में पांच अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
उमर खालिद का जमानत न मिलने पर बयान
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, उमर खालिद ने अपनी साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी से बातचीत में कहा कि अब जेल ही उनकी जिंदगी बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई है, भले ही उन्हें खुद राहत नहीं मिली।
बानो ज्योत्सना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर इस बातचीत को साझा किया। उन्होंने लिखा कि उमर खालिद ने कहा कि वह दूसरों की जमानत से बहुत खुश और राहत महसूस कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वह अगले दिन मुलाकात के लिए आएंगी, जिस पर उमर ने जवाब दिया कि अब यही जिंदगी है।
दिल्ली दंगों का इतिहास और आरोपियों की गिरफ्तारी
फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया। शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिए गए भाषणों के कारण गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2020 में उन्हें इस बड़े साजिश के मामले में भी हिरासत में लिया गया। वहीं, उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया।
सभी सात आरोपियों पर यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का आरोप है कि ये सभी दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। यूएपीए की धारा 16 के अनुसार, यदि किसी आतंकी कृत्य में किसी की मौत होती है, तो दोषी को मौत या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।










