दिल्ली हाई कोर्ट ने रेसकोर्स और पोलो क्लब को खाली कराने का आदेश रद्द किया
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली रेसकोर्स और पोलो क्लब को खाली कराने के मामले में केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज पीठ के पुराने फैसले को पूरी तरह पलटते हुए, इन क्लबों को जमीन से बेदखली की रोक को हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब सरकार तेजी से कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर इन प्रतिष्ठानों को खाली कराने का कदम उठा सकेगी।
कानूनी विवाद का मुख्य कारण और कोर्ट का फैसला
यह विवाद मुख्य रूप से केंद्र सरकार और दिल्ली रेस क्लब के बीच जमीन के मालिकाना हक को लेकर था। सरकार का तर्क था कि रेस क्लब की लीज 31 दिसंबर 1994 को समाप्त हो चुकी है और इसे फिर से रिन्यू नहीं किया गया। इस वजह से क्लब का अवैध कब्जा माना जा रहा था। पहले सिंगल जज ने रेसकोर्स को बेदखली से रोक दी थी, लेकिन अब खंडपीठ ने उस रोक को पूरी तरह हटा दिया है।
सरकार की दलीलें और कानूनी प्रक्रिया
सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि अभी यह मामला शुरुआती नोटिस के चरण में है और कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार, पहले एस्टेट ऑफिसर दोनों पक्षों की सुनवाई करेगा और यदि कोई शिकायत हो तो वह सेक्शन 9 के तहत अपील कर सकता है। सरकार ने यह भी कहा कि लीज का अस्तित्व या नहीं, कब्जे की वैधता, और भुगतानों का असर जैसे मुद्दे पहले अधिकारी को देखने चाहिए। केवल यह दावा कर देना कि लीज अभी भी जारी है, कोर्ट के फैसले को प्रभावित नहीं कर सकता।










