दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों का बदलाव और सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिए जाने के बाद अब रामलीला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मैदान को नए प्रदर्शन और धरना स्थलों में शामिल किया है। इस कदम के तहत, मैदान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) की तैनाती भी बढ़ाई गई है। साथ ही, सुरक्षा के साथ-साथ सफाई का कार्य भी तेजी से चल रहा है। मैदान के एक हिस्से की साफ-सफाई की जा रही है, जबकि रामलीला के आयोजन की तैयारियां भी पूरी हो रही हैं।
प्रदर्शन स्थलों में बदलाव और नई एसओपी का पालन
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा कर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है। इन तीनों स्थानों पर प्रदर्शन के लिए विस्तृत और संशोधित सुरक्षा प्रोटोकॉल (एसओपी) अलग से जारी किए जाएंगे। इससे पहले, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी जाती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत इन स्थानों पर ही विरोध प्रदर्शन संभव होंगे।
रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना है चुनौतीपूर्ण
हालांकि, रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने के बावजूद यहां धरना या प्रदर्शन आयोजित करना आसान नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, अगले ढाई महीने तक इस मैदान की बुकिंग के लिए कोई भी तारीख उपलब्ध नहीं है। इस साल केवल 29, 30 और 31 दिसंबर को ही इसकी बुकिंग संभव है। यह करीब 12 एकड़ में फैला मैदान लगभग 50 हजार लोगों की भीड़ को समायोजित कर सकता है, लेकिन प्रदर्शन के लिए उपलब्ध एक छोटे हिस्से में केवल 150 लोग ही एक साथ जुट सकते हैं।
प्रशासन के मुताबिक, इस मैदान की बुकिंग के लिए रोजाना लगभग 50 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता है, साथ ही 55 हजार रुपये की सुरक्षा जमा भी करनी होती है, जो वापस मिल जाती है। कुल मिलाकर, एक दिन की बुकिंग का खर्च करीब 1.21 लाख रुपये तक हो सकता है। यह प्रक्रिया दिल्ली नगर निगम (Delhi Municipal Corporation) के हॉर्टिकल्चर विभाग के माध्यम से पूरी की जाती है, जिसमें दिल्ली पुलिस से एनओसी लेना भी जरूरी होता है। इस वजह से, बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करना महंगा और कठिन हो सकता है।
इसके अलावा, त्योहारों जैसे दशहरा, दिवाली और रामलीला के कारण पहले से ही मैदान की बुकिंग हो चुकी है। यही वजह है कि विरोध प्रदर्शन के लिए तारीखें मिलना मुश्किल हो रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जब मैदान में रामलीला के दो आयोजन हो रहे हैं, तो वहां विरोध प्रदर्शन कैसे संभव है। उन्होंने इसे सरकार की व्यवस्था में खामियों का संकेत माना है।
बड़े प्रदर्शन और ट्रैफिक पर प्रभाव
रामलीला मैदान एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है, जिसके आसपास तीन अस्पताल और नगर निगम का मुख्यालय भी है। बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान यहां की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे समय पर असफ अली रोड पर यातायात की दिशा बदलनी पड़ती है और अन्य सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ता है।
यह मैदान कई बड़े राजनीतिक आंदोलनों का गवाह रहा है। वर्ष 1930 तक यहां एक तालाब था, जिसे बाद में भरकर मैदान का रूप दिया गया। 1932 से यहां रामलीला का मंचन शुरू हुआ। स्वतंत्रता के बाद यह मैदान राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया। 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण की मांग को लेकर यहां सत्याग्रह किया था। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी 1956 और 1957 में यहां बड़ी जनसभाएं की थीं। 1975 में आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसी मैदान में रैली की थी। 2013 में अरविंद केजरीवाल ने यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।










