सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा पेपर लीक विरोधी FIR पर सुनवाई तय की
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है, जिसमें NEET परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ करेगी।
केंद्र सरकार ने इस याचिका में कहा है कि वह प्रदर्शन से संबंधित FIR को रद्द कराने के लिए अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहता है और इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा ले रहा है। अदालत ने कहा है कि यदि पक्षकारों के बीच सहमति बनती है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है और मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई के लिए तैयार है।
प्रदर्शन और जांच प्रक्रिया का इतिहास
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के उस स्पष्टीकरण के बाद आई है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसके पहले के आदेश में ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ का अर्थ केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल व्यक्तियों से है। अदालत ने यह भी कहा था कि अन्य छात्रों के खिलाफ FIR को राज्य कानून के अनुसार बंद या वापस लिया जा सकता है।
20 जुलाई को CJP (कॉमन जस्टिस प्रोटेस्ट) के नेतृत्व में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई थीं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया था।
प्रदर्शन और जांच समिति का गठन
20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुए इस प्रदर्शन का मकसद NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को उजागर करना था, जो कई शहरों में फैल गया था। 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लेने के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान एक उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे थे। इस समिति को देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों और अन्य आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।









