दिल्ली में प्रदर्शन पर पुलिस और पार्टी के बीच टकराव
दिल्ली में जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन को लेकर पुलिस और पार्टी के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। CJP ने 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद पार्टी के समर्थक प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे, जिससे तनाव बढ़ गया। पुलिस ने अभीजीत दीपके, सौरव दाम, आशुतोष रांका, धुव्र राठी समेत 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
पुलिस ने प्रदर्शन रोकने के कारण बताए मुख्य कारण
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। सबसे पहले, प्रदर्शन की जानकारी देर से मिलना। दूसरा, पूर्व में हुए प्रदर्शनों में तय शर्तों का उल्लंघन होना। और तीसरा, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं। पुलिस का दावा है कि CJP ने 7 अक्टूबर को ही प्रदर्शन की जानकारी दी थी, जबकि आयोजन 10 अक्टूबर को था। इस तरह पुलिस को केवल तीन दिनों का समय मिला, जिससे तैयारी करना मुश्किल हो गया।
क्या प्रदर्शन के लिए अनुमति जरूरी है और नियम क्या हैं?
दिल्ली में किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए आयोजकों को संबंधित पुलिस अधिकारी के पास आवेदन देना अनिवार्य है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त को आवेदन करना पड़ता है, जिसमें प्रदर्शन का उद्देश्य, तारीख, समय, आयोजकों की जानकारी और अनुमानित भीड़ का विवरण शामिल होता है। पुलिस इन जानकारियों के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात का प्रबंधन करती है। केवल आवेदन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुमति प्राप्त करना भी जरूरी है।
प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर क्या कर सकती है पुलिस? यदि कोई प्रदर्शन बिना अनुमति के किया जाता है या प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जमा होती है, तो पुलिस उन्हें रोक सकती है। स्थिति के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है और कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।








