दिल्ली में NSUI प्रदर्शन के दौरान महिला कांस्टेबल से मारपीट का मामला बढ़ता जा रहा है
दिल्ली में NSUI (राष्ट्रीय छात्र संघ ऑफ इंडिया) के विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई मारपीट का मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, महिला कांस्टेबल चंचल नई दिल्ली के क्षेत्र में तैनात थीं और उस समय ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान, NSUI के कार्यकर्ता अपने प्रदर्शन को लेकर आक्रामक रवैया अपना रहे थे। पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे, तभी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रदर्शन के दौरान महिला कांस्टेबल के साथ हुई हिंसा और आरोप
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को संभालने का प्रयास कर रहे थे, तभी NSUI की एक महिला कार्यकर्ता ने बस की चाबी छीन ली और उसे जमीन पर फेंक दिया। जब महिला कांस्टेबल चंचल ने उसे रोकने की कोशिश की, तो आरोप है कि उस महिला कार्यकर्ता ने उनके साथ मारपीट की। इस घटना में महिला कांस्टेबल को बस से गिराकर जमीन पर गिराने का भी आरोप है।
मेडिकल लीगल केस और दोनों पक्षों के आरोप
घटना के बाद महिला कांस्टेबल ने अपने मेडिकल लीगल केस (MLC) का प्रकरण दर्ज कराया है और इस पूरे मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मारपीट की घटना की जांच की जा रही है। दूसरी ओर, हिरासत में ली गई एक महिला प्रदर्शनकारी ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि महिला कांस्टेबल चंचल यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की।
प्रदर्शनकारी का आरोप है कि हिरासत के दौरान उसे डिटेंशन बस में पीटा गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट करते हुए उसे गला दबाया, नाखूनों से खरोंचा और थप्पड़ मारे। इस घटना में उसकी बाली भी टूट गई, जिसके कारण उसे अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। प्रदर्शनकारी ने यह भी कहा कि पुलिस ने उसे थाने के कमरे नंबर 107 में ले जाकर मारपीट की।
उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ डंडों और मुक्कों से भी हिंसा की। साथ ही, पुलिस ने उसके राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां भी कीं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद, दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावों को प्रस्तुत किया है। महिला कांस्टेबल ने मेडिकल जांच कराई है और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी है। वहीं, प्रदर्शनकारी ने भी हिरासत के दौरान मारपीट और अस्पताल में इलाज कराने का दावा किया है।









