दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन वर्ष 2025 तक इसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। हर सर्दियों में वायु गुणवत्ता गिरने लगती है, और इस दौरान ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इस योजना के तहत निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाती है, वाहनों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं और स्कूलों को बंद कर दिया जाता है। बावजूद इसके, आम जनता को स्वच्छ और सुरक्षित हवा मिलना अभी भी दूर की बात है।
क्या वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति प्रभावी है?
प्रश्न उठता है कि क्या वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति (CAQM), जिसे अगस्त 2021 में केंद्र सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) की जगह स्थापित किया था, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सफल हो पा रही है। इस समिति को नियम बनाने, आदेश जारी करने, उल्लंघनों पर कार्रवाई करने और राज्यों को बाध्य करने की व्यापक शक्तियां दी गई हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और पर्यावरण से जुड़े सदस्य शामिल हैं। फिर भी, इसकी अधिकांश कार्रवाई ग्रेडेड रिस्पॉन्स प्लान (GRAP) के कार्यान्वयन तक ही सीमित रह जाती है।
समीक्षा और चुनौतियां
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि यह समिति प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान करने और स्थायी समाधान प्रदान करने में असमर्थ रही है। यह रवैया गैर-जिम्मेदाराना माना गया, क्योंकि प्रदूषण की जड़ तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। RTI के अनुसार, CAQM को हर साल करोड़ों रुपये का बजट मिला और खर्च भी किया गया, फिर भी जमीन पर प्रदूषण में कोई महत्वपूर्ण कमी नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि CAQM केवल प्रदूषण के लक्षणों को नियंत्रित कर रही है, जबकि मूल कारणों पर ध्यान नहीं दे रही। पर्यावरण कार्यकर्ता स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जिसमें पूरे साल के लिए ठोस योजनाएं, स्रोत-आधारित नीतियां और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। केवल ठंड के मौसम में GRAP लागू कर प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। स्वच्छ हवा हर मौसम में हर नागरिक का अधिकार है।










