दिल्ली में बच्चों और महिलाओं की गुमशुदगी की बढ़ती घटनाएं
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लापता होने की खबरें सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इन खबरों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले 15 दिनों में ही दिल्ली में 800 से अधिक लोग गुम हो चुके हैं। हर दिन लगभग 54 लोग लापता हो रहे हैं, जिनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं हैं। इस मुद्दे ने तब और भी तूल पकड़ लिया जब कुछ लोगों ने इसे नई फिल्म ‘मर्दानी-3’ का प्रचार स्टंट बताया।
सत्यता और आंकड़ों की पड़ताल
दिल्ली पुलिस ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। पुलिस का कहना है कि लड़कियों की गुमशुदगी को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों को प्रचार के तौर पर देखा जाना चाहिए। इस संदर्भ में, हमने फैक्ट चेक के माध्यम से इन आंकड़ों की जांच की है और पाया है कि वर्ष 2026 के पहले 15 दिनों में दिल्ली में कुल 807 लोग गुम हुए हैं, जो कि प्रतिदिन लगभग 54 की संख्या बनती है। यह आंकड़ा दिल्ली की विशाल आबादी को देखते हुए चिंता का विषय है, लेकिन पिछले पांच वर्षों की तुलना में यह संख्या स्थिर या कम हुई है।
गुमशुदगी के पीछे क्या कारण हैं और पुलिस की भूमिका
महिलाओं की गुमशुदगी की घटनाएं हर साल अधिक देखने को मिलती हैं, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत मामले महिलाओ के ही होते हैं। सबसे अधिक गुमशुदगी की रिपोर्टें 12 से 18 वर्ष की उम्र के युवाओं से संबंधित हैं। इन बच्चों के लापता होने के कारणों में अपरहण, फिरौती, या फिर पढ़ाई-लिखाई के तनाव के साथ-साथ दोस्तों के साथ बिना बताए कहीं चले जाना भी शामिल है। राहत की बात यह है कि अधिकतर लापता लोग खुद ही या तो पुलिस की मदद से मिल जाते हैं या फिर घर लौट आते हैं। 2021 से 2025 के बीच, दिल्ली में 25,000 से अधिक युवाओं के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से लगभग 21,000 बच्चे मिल चुके हैं।










