दिल्ली में PG भवनों की सुरक्षा का विस्तृत सर्वेक्षण
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी (प्री-ग्रेजुएट) भवनों की सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच शुरू की। इस प्रक्रिया में राजधानी के कुल 2453 पीजी भवनों का निरीक्षण किया गया, जिसमें से 95.5 प्रतिशत यानी 2342 भवन सुरक्षित पाए गए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिकांश भवन मानकों के अनुरूप हैं, लेकिन कुछ इमारतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
सर्वे में सामने आई कमजोर और खतरनाक इमारतें
हालांकि अधिकांश पीजी भवन सुरक्षित हैं, लेकिन सर्वेक्षण में कुछ भवनों की स्थिति चिंताजनक पाई गई। चार भवन खतरनाक श्रेणी में आए, जिनमें कुल 89 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 85 भवन संभावित रूप से कमजोर पाए गए हैं। मरम्मत की आवश्यकता वाले भवनों की संख्या भी महत्वपूर्ण है, जिसमें 121 भवन शामिल हैं। इनमें से 91 भवन मामूली मरम्मत के लिए चिन्हित किए गए हैं, जबकि 30 भवनों को गंभीर मरम्मत की जरूरत है।
क्षेत्रवार स्थिति और मरम्मत की जरूरतें
विशेष रूप से दक्षिण जोन में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई है, जिसमें सिविल लाइंस और केशव पुरम जैसे इलाकों में मरम्मत की आवश्यकता वाले भवन अधिक हैं। केशव पुरम में 321 भवनों का सर्वे हुआ, जिनमें से 20 खतरनाक पाए गए, जबकि 3 भवन मामूली मरम्मत के योग्य हैं। सिविल लाइंस में 608 पीजी भवनों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 544 सुरक्षित हैं, लेकिन 38 भवनों को मामूली मरम्मत की जरूरत है। वहीं, करोल बाग और नजफगढ़ जैसे इलाकों में भी कमजोर संरचनाएं मिली हैं।
वहीं, नरेला, रोहिणी, सिटी एसपी, शाहदरा उत्तर, पश्चिम और सेंट्रल जोन में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। रोहिणी के एक डिवीजन में सभी 36 भवन सुरक्षित पाए गए, और सेंट्रल जोन के दोनों डिवीजनों में कुल 191 भवनों में कोई मरम्मत या खतरा नहीं दिखा।









