दिल्ली के नए मास्टर प्लान में आवास और शहरी विकास की रणनीति
आगामी दो दशकों में दिल्ली की तेजी से बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य बेहतर आवास सुविधाएं प्रदान करना, कागजी कार्यवाही को सरल बनाना और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करना है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य है कि शहर में रहने की गुणवत्ता में सुधार हो और यमुना नदी का संरक्षण भी किया जा सके।
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट और ग्रीनफील्ड क्षेत्रों का विकास
अगले बीस वर्षों में दिल्ली का आकार बदलने के लिए, नए मास्टर प्लान के तहत ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति को लागू किया जाएगा। इस नीति के अंतर्गत मेट्रो और रेलवे गलियारों के साथ ऊंची इमारतों का निर्माण संभव होगा, जिससे आवास की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सूत्रों के अनुसार, 2047 तक दिल्ली की आबादी में भारी बढ़ोतरी का अनुमान है, और इस दौरान लगभग 17 लाख नई आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।
लैंड पूलिंग मॉडल का उपयोग कर शहर के ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में नए सेक्टरों का विकास किया जाएगा, जो नए मास्टर प्लान का हिस्सा होगा। जुलाई में, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी TOD नीति के तहत डेवलपर संस्थाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। यह कॉरिडोर-आधारित योजना 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें मुख्य रूप से मेट्रो गलियारों और रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर के दायरे में किफायती आवास का निर्माण शामिल है।
आवासीय विस्तार और यमुना ओ-जोन का संरक्षण
आवास की कमी को पूरा करने के लिए, अर्बन एक्सटेंशन रोड II (UER II) के दोनों ओर 250 मीटर के क्षेत्र में ऊंची इमारतों का निर्माण भी नए मास्टर प्लान में शामिल किया जा सकता है। साथ ही, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने यमुना ओ-जोन में विभाजन को भी मंजूरी दी है। बाढ़ के मैदान के मुख्य क्षेत्र में किसी भी तरह के कंक्रीट के ढांचे की अनुमति नहीं होगी, जबकि शेष क्षेत्र में केवल मनोरंजक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।
एक अधिकारी ने बताया कि MPD 2047 के अनुसार, ओ-जोन में एक विभाजन किया जाएगा, जिसमें मुख्य बाढ़ क्षेत्र में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं होगी। वहीं, भाग दो के क्षेत्र में पार्क और मनोरंजक संरचनाओं का विकास किया जाएगा। लैंड पूलिंग नीति के तहत, DDA उन स्थानों पर सड़क नेटवर्क विकसित करेगा जहां 30 मीटर या उससे अधिक का राइट-ऑफ-वे है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी के 174 गांवों में हरित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा।
साथ ही, उपराज्यपाल ने कहा कि यह मास्टर प्लान अधिक आसान व्यवसायिक प्रक्रिया, बेहतर जीवनशैली और स्वच्छ, हरित राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना का उद्देश्य प्रक्रियागत देरी को कम कर परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देना है। इसी संदर्भ में, पुराने दो-मंजिला आवासीय मकानों के पुनर्विकास के लिए भी नई नीति बनाई गई है, ताकि कमजोर ढांचे वाले मकानों का सुधार हो सके।
डीडीए ने बताया कि 1962 में विकसित मास्टर प्लान के तहत बने कई पुराने मकान 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं और कमजोर ढांचे के कारण पुनर्विकास की आवश्यकता है। नए नियमों के अनुसार, इन इकाइयों को भी पुनर्विकास का अधिकार मिलेगा, जिससे आवासीय क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सकेगा। इस पूरी योजना को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा, ताकि दिल्ली का नियोजित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।









