दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की गंभीर स्थिति
दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की खराब स्थिति का खुलासा हुआ है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करता है। RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन अस्पतालों में लगभग एक तिहाई वेंटिलेटर अभी भी कार्यशील नहीं हैं। यह आंकड़ा कोरोना महामारी के दौरान जीवन रक्षक उपकरण के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन मशीनों की देखभाल में हुई उदासीनता को दर्शाता है।
RTI रिपोर्ट से पता चला है कि अस्पतालों में खराब वेंटिलेटर की संख्या कितनी है
इंडिया टुडे द्वारा प्राप्त RTI डेटा के अनुसार, दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), लोक नायक अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में कुल 297 वेंटिलेटर लगाए गए हैं। इनमें से लगभग 92 वेंटिलेटर यानी 31 प्रतिशत मशीनें अभी भी खराब पड़ी हैं। खासतौर पर लोक नायक अस्पताल में स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहां कई विभागों में 70 से अधिक वेंटिलेटर पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं।
PM CARES फंड से प्राप्त वेंटिलेटर भी फेल
सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि अधिकांश खराब वेंटिलेटर PM CARES फंड से खरीदे गए हैं। RTI रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 41 PM CARES वेंटिलेटर अभी भी कार्यशील नहीं हैं। कुछ वार्डों में तो पूरे PM CARES वेंटिलेटर ही फेल हो चुके हैं, जैसे कि लोक नायक अस्पताल के वार्ड 32 में 12 में से कोई भी वेंटिलेटर काम नहीं कर रहा है। वहीं, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल का ICU पूरी तरह से कार्यशील है, जो इस स्थिति का एक अच्छा उदाहरण है।
विभिन्न विभागों में वेंटिलेटर की स्थिति और सुधार की आवश्यकता
अस्पतालों के विभिन्न विभागों में वेंटिलेटर की कार्यक्षमता का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि ओब्स्टेट्रिक्स, गायनाकोलॉजी और ट्रॉमा सेंटर जैसे विभागों में अधिकांश मशीनें सही ढंग से काम कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, इन विभागों में 95 प्रतिशत वेंटिलेटर फंक्शनल हैं। वहीं, मेन कैजुअल्टी, इमरजेंसी यूनिट्स और पीडियाट्रिक्स विभागों में स्थिति खराब है, जहां केवल आधे से कम वेंटिलेटर ही कार्यशील हैं। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल का प्रदर्शन बेहतर है, जहां ICU के सभी वेंटिलेटर सही ढंग से काम कर रहे हैं।
अतिरिक्त जानकारी: MRI मशीनों की स्थिति भी चिंताजनक
RTI रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में MRI मशीनों की स्थिति भी ठीक नहीं है। गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल और लोक नायक अस्पताल में केवल एक-एक MRI मशीन ही कार्यशील है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अस्पतालों में उपकरणों की देखभाल और रख-रखाव पर अभी भी ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।










