दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में खरीद प्रक्रिया की जांच तेज
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में केंद्रीय प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के माध्यम से की गई खरीदारी की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने स्वास्थ्य सचिव रुपेश कुमार ठाकुर को नोटिस जारी कर, ओआरएस, हैंडहेल्ड पोर्टेबल X-Ray मशीनें और बेडशीट की खरीद से संबंधित विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, सरकारी अस्पतालों में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और कंज्यूमेबल्स की खरीद में हो रही लगातार देरी को लेकर भी एक अलग से शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। विभाग को इन सभी मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल और विभागीय जवाबदेही
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी नोटिस में खासतौर पर ओआरएस की खरीद प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए गए हैं। पूछा गया है कि 15 रुपये प्रति सैशे की दर से ओआरएस की खरीद किस आधार पर की गई, इसकी पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड कहां है और इस ठेके को किस वेंडर को दिया गया। विभाग से इन सभी वित्तीय विवरणों की भी मांग की गई है, जिसमें खरीद दर, वेंडर द्वारा दी गई छूट, जीएसटी और अंतिम लागत का पूरा ब्योरा शामिल है।
इसके अलावा, बेडशीट की खरीद को लेकर भी विभाग से विस्तृत रिपोर्ट की अपेक्षा की गई है। करीब 16 लाख बेडशीट को ऊंची कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों का उल्लेख करते हुए, विभाग से 2019-2025 के बीच खरीदी गई सभी बेडशीटों का विवरण, खरीद की संख्या, दरें, स्पेसिफिकेशन और प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। साथ ही, इन कीमतों की तुलना अन्य सरकारी अस्पतालों और विभागों में समान गुणवत्ता की बेडशीट की खरीद दर से करने को भी कहा गया है।
X-Ray मशीनों और बेडशीट की खरीद में जांच का दायरा
स्वास्थ्य मंत्री ने हैंडहेल्ड पोर्टेबल X-Ray मशीनों की खरीद को भी जांच के दायरे में लाया है। आरोप हैं कि 2026 में इन मशीनों की खरीद पर लगभग 33 लाख रुपये प्रति मशीन की दर से खर्च किया गया, जो अन्य सरकारी संस्थानों की तुलना में अधिक है। विभाग से इन मशीनों की तकनीकी विशिष्टताओं, खरीद दर, अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के संस्थानों द्वारा समान मशीनों की खरीद का तुलनात्मक विवरण मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों, उपकरणों और कंज्यूमेबल्स की खरीद में हो रही देरी को गंभीर मानते हुए, विभाग को अलग से शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। इसमें लंबित खरीद प्रक्रियाओं के लिए विस्तृत एक्शन प्लान और आइटम-वाइज टाइमलाइन भी मांगी गई है, जिसे विभाग ने बार-बार नहीं पूरा किया है। 28 मई 2026 को पहली बार इन निर्देशों का पालन करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद 17 जून 2026 और 22 जुलाई 2026 को भी रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन विभाग ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने इन लापरवाहियों को गंभीर प्रशासनिक चूक माना है, जो सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। विभाग से पूछा गया है कि इन निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया, रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं भेजी गई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
स्वास्थ्य विभाग को 5 अगस्त 2026 तक विस्तृत जवाब और एक्शन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि विभाग इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। इस नोटिस की प्रति उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गई है।










