दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थिति और सरकारी कदम
दिल्ली के प्रसिद्ध जिमखाना क्लब की संचालन समिति ने सोमवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक संस्था के कार्यों में कोई भी बाधा न डाली जाए। यह अपील उस समय सामने आई जब पता चला कि पिछले वर्ष सितंबर से अब तक क्लब प्रबंधन को लगभग 48 करोड़ रुपये का बकाया ग्राउंड रेंट चुकाने के लिए तीन नोटिस भेजे गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने जानकारी दी कि अंतिम नोटिस अप्रैल में भेजा गया था, जो 22 मई को जारी बेदखली के आदेश से कुछ ही हफ्ते पहले का था। क्लब के सदस्यों का आरोप है कि उन्हें इस बकाया राशि के बारे में पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी।
क्लब के बकाया और सरकार की चेतावनी
लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने पिछले साल सितंबर, मार्च 2026 और अप्रैल 2026 में कई बार नोटिस भेजकर क्लब से बकाया ग्राउंड रेंट की अदायगी की मांग की थी। अप्रैल में ही L&DO ने चेतावनी दी थी कि यदि एक हफ्ते के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वह प्रॉपर्टी को वापस लेने और क्लब परिसर पर फिर से कब्जा करने के कदम उठाएगा।
इस बीच, सोमवार को भारत सरकार द्वारा गठित क्लब की देखरेख करने वाली समिति ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय तथा L&DO से अनुरोध किया कि यदि क्लब को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए जमीन का कोई विकल्प भी प्रदान किया जाए। समिति ने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सदस्यों, कर्मचारियों और हितधारकों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
क्लब की वित्तीय स्थिति और भविष्य की दिशा
समिति ने बताया कि उसने 1 अप्रैल 2022 के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद से क्लब के प्रशासन और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस दौरान क्लब की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2023-24 के अनुमानित लाभ और हानि विवरण में 9.25 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया गया है, जबकि 2021-22 में यह घाटा 12.39 करोड़ रुपये था।
यह सुधार बिना नई सदस्यता जोड़ने के संभव हुआ, जो पहले क्लब की आय का मुख्य स्रोत था। समिति ने यह भी दावा किया कि उसने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया, सभी विभागों में मानक संचालन प्रक्रियाएं लागू कीं और लंबित मुकदमों को कम किया। साथ ही, सदस्यता रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने का प्रयास भी किया गया, जिसमें लगभग 43 प्रतिशत रिकॉर्ड अभी भी उपलब्ध नहीं थे।
समिति के सदस्य ने कहा कि क्लब को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए भारी खर्च आएगा, क्योंकि दशकों से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को फिर से बनाना पड़ेगा। सदस्यों ने इस प्रस्तावित अधिग्रहण को ‘गैर-कानूनी’ करार देते हुए इसकी निंदा की और कहा कि क्लब का इस्तेमाल हजारों सदस्य और उनके परिवार खेल, मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करते हैं।
अंत में, समिति ने बताया कि L&DO और शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है ताकि क्लब को उसकी वर्तमान जगह पर ही बनाए रखा जा सके। सदस्यता की लंबी वेटिंग लिस्ट इस बात का संकेत है कि क्लब की मांग अभी भी बहुत अधिक है, और संस्था को बंद करने के बजाय सुधार की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।










