दिल्ली में ईंधन बचाने के लिए सरकार का नया कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत सोमवार से ‘मेट्रो डे’ मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें सभी मंत्री और अधिकारी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। सरकार ने विभागीय वाहनों में पेट्रोल की खपत में 20 प्रतिशत की कटौती का भी फैसला किया है। इन कदमों का उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि प्रदूषण को घटाना और नागरिकों को मेट्रो यात्रा के लिए प्रोत्साहित करना भी है। यह नई नीति उन विभागों में लागू की जा रही है, जहां कामकाज के तरीके को लचीला बनाया जा सकता है।
वर्क फ्रॉम होम और नई टाइमिंग से मिलेगी राहत
दिल्ली सरकार के इस निर्णय का कई अधिकारियों ने स्वागत किया है। आईटीओ स्थित कार्यालय में कार्यरत एक अधिकारी ने बताया कि वह रोजाना डासना (Dasna) से 40 किलोमीटर का सफर पेट्रोल कार से करते थे। अब उन्होंने मेट्रो का सहारा लेने का फैसला किया है, जिससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। कर्मचारी मानते हैं कि जब बड़े अधिकारी और मंत्री खुद मेट्रो में यात्रा करेंगे, तो जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा।
वहीं, रोहिणी (Rohini) से दिल्ली सचिवालय आने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वह रोजाना 35 किलोमीटर का सफर करते हैं और वर्क फ्रॉम होम से कोई समस्या नहीं है। कोविड काल में भी उन्होंने घर से काम किया था, और ऑनलाइन माध्यम से मीटिंग्स और संचार कार्य आसानी से निपटाए। तकनीक के इस दौर में घर से काम करना आसान हो गया है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है। ऐसे कर्मचारी जिनका काम डेस्क और कोऑर्डिनेशन तक सीमित है, वे घर से काम करने को व्यावहारिक मान रहे हैं।
फील्ड कर्मचारियों के लिए चुनौतियां और सरकार का मकसद
हालांकि, इस फैसले का प्रभाव हर विभाग पर समान नहीं होगा। पीडब्ल्यूडी (PWD), दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board), पावर और ट्रांसपोर्ट विभागों में अधिकतर कर्मचारी फील्ड में कार्यरत हैं, जिनका 70 प्रतिशत काम मौके पर ही होता है। इन कर्मचारियों का कहना है कि वर्क फ्रॉम होम का लाभ केवल कार्यालय में बैठने वाले कर्मचारियों को ही मिलेगा। फील्ड ड्यूटी करने वालों के लिए घर से काम करना लगभग असंभव है, क्योंकि उनके कार्य शारीरिक उपस्थिति पर निर्भर हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि पानी की आपूर्ति, सीवर सफाई और रखरखाव जैसे कार्य सुबह जल्दी फील्ड में जाकर ही पूरे किए जाते हैं। इसलिए, इन कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यावहारिक नहीं है। हालांकि, पेट्रोल की कमी को देखते हुए उन्होंने भी मेट्रो का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, लेकिन नई समय-सारणी उनके रूटीन में फिट नहीं बैठती। उनका काम जल्दी शुरू हो जाता है, जिससे नई टाइमिंग से उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का संरक्षण और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहित करना है। वह निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना चाहती है, ताकि ईंधन आयात और प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण पाया जा सके। ऑफिस में डेस्क जॉब करने वाले कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम और नई टाइमिंग से राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि फील्ड कर्मचारियों को अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा। सरकार इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति बना रही है।











