दिल्ली में प्रदर्शन और हिंसक झड़पों का दौर जारी
देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद, 21 जुलाई को भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया है। सोशल मीडिया पर कनॉट प्लेस (Connaught Place) से वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर पथराव किया और पुलिस वैन को निशाना बनाया। इस दौरान उपद्रवियों ने नारेबाजी करते हुए सुरक्षा बलों की वैन पर हमला किया।
संसद मार्च के बाद हिंसक प्रदर्शन और पुलिस पर हमला
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद 21 जुलाई को भीड़ ने ‘कल का हिसाब लेकर रहेंगे’ जैसे नारे लगाए। इस हिंसक घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस और RAF के जवान स्थिति को संभालने में लगे रहे। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ ने एक जवान को चारों ओर से घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। कुछ लोग उपद्रवियों से जवान के साथ मारपीट न करने की अपील भी कर रहे थे। इसके बाद भीड़ ने पुलिस और RAF के वज्र वाहन (Vajra Vehicle) पर पथराव किया। पुलिस ने इस मामले में कई अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई
संसद के मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों का जमा होना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मंगलवार शाम से रात तक उपद्रवियों ने सड़कों पर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। शुरुआत में पुलिस ने इन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने इसका फायदा उठाकर बवाल मचाया। सवाल उठ रहे हैं कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तय था और कोई मार्च का ऐलान नहीं था, तो ये भीड़ कहां से आई? धारा 163 के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में उपद्रवियों का कैसे जमावड़ा हुआ? साथ ही, पुलिस और RAF के जवानों को निशाना क्यों बनाया गया? दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।











