दिल्ली के आर.के. पुरम में शुरू हुआ ‘कैफे बियॉन्ड आइज़’ युवाओं के लिए नई उम्मीद
दिल्ली के आर.के. पुरम में स्थापित ‘कैफे बियॉन्ड आइज़’ अब चर्चा का विषय बन चुका है। इस अनूठे कैफे में काम करने वाले सभी कर्मचारी दृष्टिबाधित युवा हैं, जिनके जज़्बे और हौसले अद्भुत हैं। यह कैफे केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीवन जीने का एक प्रेरणादायक प्रयास भी है। यहाँ लगभग पंद्रह लड़कियों को न केवल काम का अवसर मिला है, बल्कि उन्हें अपने हुनर को निखारने का भी मौका मिला है। इस कैफे के निर्देशक भावना सहाय ने बताया कि अब तक हम 60 दिव्यांग युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें नौकरी पर लगाया है। इन युवाओं की ट्रेनिंग और नौकरी उनके देखने की क्षमता के आधार पर तय की जाती है, जिसमें कोई भी पूरी तरह से देख नहीं सकता।
विशेष प्रशिक्षण और पेशेवर कुकिंग का अनुभव
इन युवाओं को खास तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें देखने के बजाय छूने, सूंघने और स्वाद के माध्यम से खाना बनाने की कला सिखाई जाती है। मशहूर शेफ के मार्गदर्शन में ये युवा पेशेवर कुकिंग की तकनीक सीख रहे हैं। इस कैफे में काम कर रही पुष्पा पार्शियल डेफ एंड ब्लाइंड हैं, जो बताती हैं कि वह पहले एक स्पोर्ट्स प्लेयर थीं, लेकिन अब अपना पूरा समय इस कैफे को दे रही हैं। इस अनुभव ने उनके जीवन को नई दिशा दी है।
कैसे चलता है यह अनूठा कैफे?
क्या आप सोच सकते हैं कि यह कैफे पूरी तरह से दृष्टिबाधित लोगों द्वारा संचालित है? हमने इसका एक डेमो भी देखा। हमने ऑर्डर दिया और जाना कि कैसे हमारा खाना तैयार किया जाता है और टेबल तक पहुंचाया जाता है। यूपी की उपासना, जो बचपन से दृष्टिहीन थीं, बताती हैं कि नर्सिंग कोर्स के दौरान एक हादसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी खत्म हो गई है, लेकिन फिर उन्हें कुकिंग और अन्य प्रशिक्षण दिया गया। अब वह इस कैफे में खुशी-खुशी काम कर रही हैं और लोगों को भी इस कैफे का कॉन्सेप्ट और खाना बहुत पसंद आ रहा है। यह पहल केवल सहानुभूति का विषय नहीं है, बल्कि अवसर देने की सोच को मजबूत बनाती है। सही माहौल मिले तो ये युवा किसी से कम नहीं हैं।











