दिल्ली विधानसभा में घुसपैठ का रहस्यपूर्ण मामला सामने आया
दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में सेंध लगाने की घटना ने सभी को चौंका दिया है। एक SUV कार से जबरन विधानसभा परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करने वाले आरोपी का मकसद क्या था, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी अपने भतीजे के लापता होने की बात को ध्यान में लाकर इस घटना को अंजाम देना चाहता था। इस संदिग्ध का यह कदम उसकी मानसिक स्थिति या फिर किसी अन्य कारण से प्रेरित हो सकता है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।
आरोपी की गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद आरोपी सरबजीत सिंह को अदालत में पेश किया गया, जहां उसे आठ दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। इस दौरान पुलिस उसकी गतिविधियों, आने-जाने के रास्तों, मुख्य उद्देश्य और CCTV फुटेज की जांच करेगी। पुलिस ने पहले दस दिनों की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसे आठ दिनों की अनुमति दी है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी के बयानों की सत्यता की भी जांच की जाएगी। उसकी कार से कोई हथियार नहीं मिला है, लेकिन उसकी तेज गति और खतरनाक ड्राइविंग से सुरक्षाकर्मियों को खतरा था।
आरोपी का मानसिक स्वास्थ्य और लापता भतीजा
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिल्ली के रास्तों से अनजान था। उसने दो टैक्सी ड्राइवरों को अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर भेजने के लिए 2000 रुपए दिए थे। घटना के दो घंटे बाद ही उसे दो अन्य व्यक्तियों के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दोनों टैक्सी ड्राइवरों से पूछताछ की, लेकिन अभी तक उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटना सोमवार दोपहर 2:10 बजे हुई, जब सरबजीत सिंह ने अपनी कार से दिल्ली विधानसभा के गेट नंबर 2 में प्रवेश किया। उसने स्पीकर की गाड़ी में गुलदस्ता और माला रखी थी, और कुछ ही मिनटों में वह बाहर निकल गया। इस घटना से संकेत मिलता है कि आरोपी का मकसद नुकसान पहुंचाना था।
परिवार का दावा है कि सरबजीत सिंह मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहा है और शाहजहांपुर के अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। परिवार के अनुसार, वह नारायणपुर में अपने पत्नी और बेटे के साथ रहता था। उसका भतीजा हरमनदीप सिंह, जो दिल्ली में बीटेक का छात्र था, 1 अप्रैल को लापता हो गया। परिवार ने बताया कि शुरू में भतीजे के लापता होने की जानकारी नहीं दी गई, जिससे आरोपी नाराज था। इस मामले में हत्या के प्रयास, अपराध की तैयारी, सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बल प्रयोग जैसे कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं।










