दिल्ली में वायु गुणवत्ता का लगातार खराब रहना
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले दो दिनों से गंभीर स्तर पर बनी हुई है। पंजाब में पराली जलाने के मामलों में कमी के बावजूद राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर दर्ज किया गया है। आनंद विहार, नेहरू नगर और वजीरपुर जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां वायु प्रदूषण का स्तर अत्यधिक है।
पराली जलाने में कमी के बावजूद प्रदूषण क्यों बना हुआ है?
हालांकि पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 96 प्रतिशत की गिरावट आई है, फिर भी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के अनुसार, इस साल पंजाब में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जहां 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच केवल 415 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2020 में यह संख्या 10,791 थी। हरियाणा में भी पराली जलाने की घटनाएं घटकर 55 रह गई हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामले बढ़े हैं। 2020 में इन घटनाओं की संख्या 554 थी, जो इस साल बढ़कर 660 हो गई है। मथुरा, पीलीभीत और बाराबंकी जैसे जिलों में आग लगने की घटनाएं अधिक देखी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य स्रोत अब दिल्ली के बाहर नहीं, बल्कि अंदर ही है, क्योंकि धुआं पूर्व की ओर शिफ्ट हो रहा है।
PM2.5 स्तर में भारी वृद्धि और विशेषज्ञों की चेतावनी
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, दिवाली की रात दिल्ली में PM2.5 का स्तर 157 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से बढ़कर 675 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। यह लगभग 11 गुना अधिक है और 24 घंटे का औसत स्तर 300 माइक्रोग्राम से ऊपर रहा, जो 2021 के बाद का सबसे खराब स्तर है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार तभी संभव है जब स्थानीय स्रोतों जैसे वाहनों का धुआं, सड़क की धूल और निर्माण कार्यों को सख्ती से नियंत्रित किया जाए। पराली जलाने में कमी के बावजूद प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहना दर्शाता है कि समस्या का मूल केंद्र अब दिल्ली के भीतर ही है।
GRAP स्टेज-II और राजनीतिक विवाद
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने रविवार को ही ग्रेप (GRAP) के स्टेज-II को लागू कर दिया है। इस कदम से परिवहन क्षेत्र का प्रदूषण 14.6 प्रतिशत, नोएडा से 8.3 प्रतिशत, गाजियाबाद से 6 प्रतिशत, गुरुग्राम से 3.6 प्रतिशत और पराली जलाने से 1 प्रतिशत तक कम हो सकता है। पूर्व सीपीसीबी अधिकारी दीपांकर साहा का कहना है कि हवा की गति बढ़ने से आने वाले दिनों में प्रदूषण में कमी आ सकती है।
वहीं, दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पंजाब के किसानों को पराली जलाने के लिए उकसा रहे हैं, ताकि दिल्ली की हवा और प्रदूषित हो। इस पर जवाब देते हुए AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सिरसा को “अशिक्षित” करार देते हुए कहा कि पंजाब का AQI महज 156 है, जिससे स्पष्ट है कि प्रदूषण का कारण कहीं और है।










