मोदी सरकार का मनरेगा पर बड़ा बदलाव और विपक्ष की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री द्रौपदी मुर्मू ने VB-G RAM G बिल 2025 को मंजूरी दी है, जिसके तहत मनरेगा (MGNREGA) का नया कानूनी ढांचा लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम रोजगार गारंटी योजना को 125 दिनों तक बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। वहीं, विपक्षी नेता जैसे राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इस निर्णय को लोकतंत्र और काम के अधिकार पर हमला करार दिया है।
सरकार का तर्क और विपक्ष की आलोचना
सरकार का तर्क है कि यह बदलाव ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा और योजना को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस नए कानून से मनरेगा का मूल उद्देश्य कमजोर हो जाएगा और ग्रामीण जनता के अधिकारों का हनन होगा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोदी सरकार ने बिना किसी चर्चा या संसद की मंजूरी के मनरेगा और लोकतंत्र दोनों पर बुलडोजर चला दिया है।
सोनिया गांधी का बयान और मनरेगा का ऐतिहासिक महत्व
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा है कि मोदी सरकार ने बिना किसी परामर्श के मनरेगा को खत्म करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहल रही है, जिसे अब नए कानून के तहत कमजोर किया जा रहा है। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने इस योजना का कानूनी आधार भी समाप्त कर दिया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में काम के अधिकार पर असर पड़ेगा।











