सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्टरूम में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। वकीलों ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी। साथ ही, कुछ वकीलों ने कोर्ट में पुलिसकर्मियों के बैठने की जगह को लेकर भी आपत्ति जताई। उस दिन पिटाई का शिकार हुए कई वकील भी स्वयं अदालत में उपस्थित थे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कोर्ट की व्यवस्था पर विवाद
सुनवाई के दौरान कोर्टरूम नंबर 18 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक सही ढंग से काम नहीं कर रहा था। इस समस्या को देखते हुए वकीलों ने कोर्ट से कोर्टरूम बदलने की मांग की। उनका तर्क था कि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो के जरिए पेश होना है, इसलिए लिंक का कार्यशील होना आवश्यक है। वकीलों ने कोर्ट स्टाफ से तुरंत लिंक ठीक करने का आग्रह किया। मेनका गुरुस्वामी ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बाहर की दुनिया को यह नहीं दिखना चाहिए कि किसी एक पक्ष का पक्ष लिया जा रहा है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक को बहाल करने की भी मांग की। इस बीच, कोर्टरूम में चल रही गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की बात भी सामने आई।
अधिकारों का संरक्षण और प्रदर्शनकारियों की स्थिति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के फोन जब्त किए जाने और पुलिस की कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि बिना बैज के कार्रवाई करने, अत्यधिक बल प्रयोग और गैरकानूनी हिरासत के मामलों में जवाब मांगा जाएगा। साथ ही, बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा का आदेश दिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत ही कार्रवाई होनी चाहिए और मेट्रो तथा रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। इंटरनेट सेवाओं को बाधित नहीं करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में आने-जाने पर कोई रोक नहीं होगी।
साथ ही, कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही के लिए संबंधित अधिकारियों से कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना क्यों न की जाए। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की संख्या और परिस्थितियों की जानकारी दी जाए। प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और वकीलों के साथ मारपीट के मामलों पर भी विचार किया जाएगा।









