बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे का विवाद खुलकर सामने आया
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन में सीटों के विभाजन को लेकर चल रहा विवाद अब सार्वजनिक रूप से उजागर हो गया है। वैशाली और लालगंज जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं।
वैशाली विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी संजीव कुमार ने 15 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल किया, जबकि दो दिन बाद 17 अक्टूबर को राजद के उम्मीदवार अजय कुशवाहा ने भी नामांकन कर दिया। इन दोनों उम्मीदवारों के नामांकन से महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कार्यकर्ता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर किस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करें।
दोनों दलों के बीच मतभेद और उम्मीदवारों का मैदान में उतरना
सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन अंततः दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवारों को सिंबल देकर चुनाव मैदान में उतर गए। कांग्रेस ने संजीव कुमार को टिकट दिया है, जबकि राजद ने अजय कुशवाहा को मैदान में उतारा है।
लालगंज सीट पर भी स्थिति समान है। राजद ने बाहुबली नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर दोनों दलों के उम्मीदवारों के नामांकन के समय सांसद पप्पू यादव भी मौजूद रहे।
इसके अलावा दरभंगा जिले की गौरबौराम सीट पर भी महागठबंधन में मतभेद नजर आ रहे हैं। यहां राजद के अफजल अली खान और VIP पार्टी के संतोष साहनी ने नामांकन किया है, जिससे यह सीट विवाद का केंद्र बन गई है।
महागठबंधन की आंतरिक असमंजस और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा
बिहार के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बछवारा (बेगूसराय), रोसरा (समस्तीपुर), और कहलगांव (गया) जैसी सीटों पर भी उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर मतभेद हैं।
राजद ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार तय किए हैं, जबकि कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। इन असहमतियों का असर महागठबंधन की एकता पर पड़ा है, जो चुनावी रणनीति के लिहाज से चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय नेताओं की महत्वाकांक्षा और सीटों के बंटवारे में तालमेल की कमी ने महागठबंधन की ताकत को कमजोर कर दिया है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो विपक्षी गठबंधन को इन क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।











