गणतंत्र दिवस पर बिहार की झांकी का विशेष प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत पर्व के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की झांकियों का प्रदर्शन लाल किले पर किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार की झांकी को भी शामिल किया गया है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी। इस वर्ष बिहार की झांकी का विषय है- “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”। यह झांकी बिहार के प्रसिद्ध ‘सफेद सोना’ मखाना की यात्रा को जीवंत रूप में दिखाएगी, जो मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर विश्व स्तर पर एक सुपरफूड के रूप में पहचान बना चुका है।
बिहार का मखाना: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
बिहार का मखाना, जिसे फॉक्स नट (Fox Nut) भी कहा जाता है, अब केवल स्थानीय उत्पाद नहीं रह गया है। झांकी में इसके सुपरफूड बनने की प्रक्रिया को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया गया है। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को जीआई (GI) टैग प्राप्त हुआ, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाई है। भारत पर्व के माध्यम से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करते हुए यह झांकी दिखाती है कि कैसे विभिन्न राज्यों की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक ज्ञान आधुनिक विकास के साथ जुड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना रहे हैं।
झांकी की संरचना और सांस्कृतिक महत्व
इस झांकी का निर्माण दो मुख्य भागों में विभाजित है। पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच चमकता हुआ सफेद मखाना और जीआई टैग का प्रतीक दिखाया जाएगा। इसके किनारों पर पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की सुंदर बॉर्डर इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाएगी। यह दृश्य न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि बिहार की सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है। दूसरे भाग में मखाना की खेती, कटाई, बीज संग्रहण, ग्रेडिंग और भुनाई की प्रक्रिया को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। इसमें मिट्टी के चूल्हे पर मखाना भूनती महिलाओं और मूसल से उसे तोड़ते पुरुष की पारंपरिक कौशल को दर्शाया जाएगा, जो यह साबित करता है कि मखाना उत्पादन केवल खेती नहीं, बल्कि विरासत, श्रम और महिला उद्यमिता का संगम है।









