प्रशांत किशोर को निर्वाचन आयोग का नोटिस मिला
प्रशांत किशोर, जो जन सुराज पार्टी के प्रमुख हैं, को निर्वाचन आयोग (EC) की ओर से नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस उन्हें इसलिए भेजा गया है क्योंकि उनके नाम दो अलग-अलग राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज पाए गए हैं। आयोग ने उन्हें इस संदर्भ में तीन दिन का समय दिया है ताकि वे अपना जवाब प्रस्तुत कर सकें।
वोटर लिस्ट में नामांकन का विवाद और कानूनी पहलू
सासाराम के करगहर विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर ने जानकारी दी है कि प्रशांत किशोर का नाम बिहार की वोटर लिस्ट के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में भी मौजूद है। पश्चिम बंगाल के भवानीपुर क्षेत्र में उनकी वोटर एंट्री संत हेलेन स्कूल के मतदान केंद्र पर दर्ज है। वहीं, बिहार के करगहर क्षेत्र में भी उनका मतदाता पहचान पत्र नंबर 1013123718 है। कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का नाम एक से अधिक विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में नहीं हो सकता। यदि ऐसा होता है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1960 का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके तहत एक साल तक जेल या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। इसलिए, आयोग ने प्रशांत किशोर से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
राजनीतिक और चुनावी प्रभाव
प्रशांत किशोर को दो राज्यों की वोटर लिस्ट में नाम होने का नोटिस मिलने का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। इससे उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि उनकी छवि एक निष्पक्ष और भरोसेमंद नेता की है। विपक्ष इस मुद्दे का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर सकता है और उनकी छवि को खराब करने का प्रयास कर सकता है। साथ ही, यह आरोप विपक्ष को चुनाव प्रचार के दौरान मजबूत हथियार भी दे सकता है, जिससे वे प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी पर हमला कर सकते हैं।











