बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली का खुलासा
बिहार में पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने अपने स्थान पर किसी और को परीक्षा देने के लिए भर्ती कराया था।
बायोमेट्रिक जांच में हुआ खुलासा
पुलिस के अनुसार, केंद्रीय चयन पर्षद (USGS) द्वारा कराई जा रही सिपाही भर्ती परीक्षा में भाग लेने वाले ये चारों अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल हुए थे। जब फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन से उनकी पहचान कराई गई, तो उनकी बायोमेट्रिक जानकारी लिखित परीक्षा के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी। इसके बाद पुलिस ने इन सभी को हिरासत में लेकर सख्त पूछताछ की।
धोखाधड़ी का तरीका और गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि इन अभ्यर्थियों ने अपने बदले किसी और को परीक्षा में बैठाने के लिए 50 हजार रुपये का सौदा किया था। पूछताछ में पता चला कि प्रत्येक उम्मीदवार ने अपने स्थान पर परीक्षा देने वाले अरवल निवासी आलोक कुमार को यह रकम दी थी। गिरफ्तार अभ्यर्थियों में सारण के राजेश कुमार, लखीसराय के रणवीर कुमार और संजीत कुमार शामिल हैं। चौथे आरोपी का नाम सत्यापन के बाद स्पष्ट किया जाएगा। सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
पुलिस का कहना है कि अब तक सिपाही भर्ती में धांधली के आरोप में तीस से अधिक ‘मुन्ना भाई’ गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है ताकि इस तरह की परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके। इस कार्रवाई से यह साबित होता है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने में प्रभावी भूमिका निभा रही है।










