बिहार की राजनीति में आनंद मोहन के विवादित बयानों का असर
बिहार की राजनीतिक हलचलें उस समय तेज हो गई हैं जब पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जदयू (Janata Dal United) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता तक पहुंचाया, आज वही नेता पार्टी के अंदर नजरअंदाज किए जा रहे हैं। आनंद मोहन का दावा है कि नीतीश कुमार को पार्टी में ‘जिंदा ही दफना दिया गया है’ और पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति या तस्वीरें भी नजर नहीं आतीं।
आरोपों का सिलसिला और पार्टी की प्रतिक्रिया
आनंद मोहन ने यह भी आरोप लगाया कि जदयू (JDU) में ‘पैसे की राजनीति’ का बोलबाला है, और कुछ नेता नीतीश कुमार की स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे चेतन आनंद को मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि चेतन आनंद ने सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, फिर भी उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। वहीं, जदयू के प्रवक्ता और एमएलसी संजय सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में टिकट या पद पैसे देकर नहीं मिलते और आनंद मोहन सिर्फ अपने बेटे को मंत्री न बनाए जाने से नाराज हैं।
आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक स्थिति
संजय सिंह ने कहा कि आनंद मोहन की प्रतिक्रिया भावनात्मक है और वे बिना किसी आधार के बयान दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी और सरकार के फैसले राजनीतिक और संगठनात्मक आधार पर लिए जाते हैं, न कि व्यक्तिगत मांगों पर। इस बीच, यह भी चर्चा है कि जदयू विधायक श्वेता गुप्ता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से आनंद मोहन का परिवार असंतुष्ट है। फिलहाल, आनंद मोहन ने एनडीए (NDA) या जदयू छोड़ने की कोई बात नहीं कही है, लेकिन उनके बयानों ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।









