बिहार में सरकारी बंगले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज
बिहार की राजनीति में एक नया विवाद उस समय उभर कर सामने आया है जब राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली करने का आदेश जारी किया। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, खासकर जब से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्य ने इस कदम पर तीखा विरोध जताया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब भवन निर्माण विभाग ने 27 मई को आदेश जारी कर पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड पर मौजूद सरकारी बंगला, जो राबड़ी देवी का है, को खाली करने का निर्देश दिया।
रोहिणी आचार्य का सरकार पर आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को परेशान कर जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार में हिम्मत है तो वह बंगला जबरन खाली कराकर दिखाए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को निशाना बनाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है। साथ ही, उन्होंने इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार देते हुए कहा कि पुलिस का इस्तेमाल कर किसी पूर्व मुख्यमंत्री को घर से निकालने का प्रयास लोकतंत्र के लिए खतरा है।
बंगला खाली करने का आदेश और राजनीतिक असमंजस
बिल्डिंग विभाग ने 27 मई को जारी आदेश में राबड़ी देवी के आवास को खाली करने का निर्देश दिया है। यह बंगला लोक भवन और मुख्यमंत्री आवास के पास स्थित है, और राबड़ी देवी वर्ष 2006 से इस आवास में रह रही हैं। शनिवार को जब राबड़ी देवी से इस मुद्दे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह स्वयं यह बंगला खाली नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, “सरकार चाहे तो बलपूर्वक मुझे हटाकर दिखाए, लेकिन मैं अपने इस आवास को नहीं छोड़ूंगी।” इस विवाद ने बिहार की राजनीति में नई ज्वाला जला दी है, और राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों का अहम मुद्दा मान रहे हैं।









