जीतन राम मांझी ने वायरल वीडियो पर अपनी सफाई दी
केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रीकाउंटिंग से जुड़े वीडियो को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और इससे गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं। मांझी ने यह भी कहा कि वोटिंग मशीन में कोई गड़बड़ी नहीं है और न ही किसी तरह की ‘सेटिंग’ का कोई आधार है।
टिकारी सीट पर हार का कारण उम्मीदवार की गलती
मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि टिकारी विधानसभा सीट पर हार का जिम्मेदार खुद उम्मीदवार अनिल कुमार हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही परिणाम में अनिल कुमार पीछे चल रहे थे, वह मैदान छोड़कर चले गए। मांझी ने यह भी कहा कि उन्होंने उम्मीदवार से कहा था कि यदि आप पीछे हैं तो आपको चुनाव अधिकारी के सामने जाकर रीकाउंटिंग की मांग करनी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी बताया कि हर चुनाव में ऐसा ही होता है कि जो उम्मीदवार पीछे होता है, वह रीकाउंटिंग की मांग करता है। अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए मांझी ने कहा कि वे खुद 1990 में मात्र 27 वोट से हार गए थे, लेकिन उस समय उन्होंने रीकाउंटिंग की मांग नहीं की। उनका मानना है कि यदि उस समय रीकाउंटिंग होती तो संभव है कि वे भी चुनाव जीत जाते।
2020 के चुनाव और डीएम अभिषेक सिंह का संदर्भ
मांझी ने कहा कि इसी संदर्भ में उन्हें 2020 के विधानसभा चुनाव और गया (Gaya) के तत्कालीन डीएम (District Magistrate) अभिषेक सिंह का उदाहरण याद आया। उन्होंने बताया कि उस समय अभिषेक सिंह सक्षम अधिकारी थे और जब पुनर्मतगणना की मांग की गई, तो उन्होंने इसकी अनुमति दी। मांझी ने कहा कि इस बार भी कलेक्टर (Collector) अच्छे थे और यदि पुनर्मतगणना की मांग की जाती तो प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाता।
मांझी ने यह भी कहा कि बिना किसी बात किए मैदान छोड़ देना गलती थी। यदि रीकाउंटिंग की मांग की जाती तो परिणाम अलग हो सकता था।
वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर मांझी ने जोर देते हुए कहा कि ईवीएम (Electronic Voting Machine) पूरी तरह से सही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं है। उनका आरोप था कि असली समस्या कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के मनोबल से जुड़ी है।
मांझी ने कहा कि कई बार कार्यकर्ता और उम्मीदवार निराश होकर मैदान छोड़ देते हैं, जबकि उन्हें अंत तक लड़ना चाहिए। उन्होंने अपनी राय इसी भावना के साथ रखी थी, जिसे अब गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
विवाद की शुरुआत और वायरल वीडियो का संदर्भ
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने छह सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से पांच पर पार्टी ने जीत हासिल की। केवल टिकारी विधानसभा सीट पर ही हार का सामना करना पड़ा, जहां HAM के उम्मीदवार अनिल कुमार को 2058 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में अनिल कुमार ने इसी टिकारी सीट से रीकाउंटिंग के बाद 2630 वोटों से जीत दर्ज की थी। इसी तुलना को लेकर गया (Gaya) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मांझी ने बयान दिया था, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में क्या कहा गया
वायरल वीडियो में जीतनराम मांझी को यह कहते हुए सुना गया कि 2020 में जब अनिल कुमार चुनाव हार रहे थे, तो उन्होंने मांझी से संपर्क कर मदद मांगी थी। मांझी ने दावा किया कि उस समय वह करीब 2700 वोट से पीछे थे, लेकिन प्रयासों के बाद चुनाव जीत गए।
उन्होंने यह भी कहा कि उस समय गया जी के डीएम अभिषेक सिंह ने फोन कर बताया था कि वह 2700 वोट से पीछे थे। मांझी ने यह भी जोड़ा कि इस बार उम्मीदवार केवल 1600 वोट से पीछे थे, लेकिन उन्होंने उनसे बात तक नहीं की और मैदान छोड़कर चले गए। इसी बयान को आधार बनाकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि 2020 का चुनाव ‘सेटिंग’ के जरिए जिताया गया था, जिसे मांझी ने सिरे से खारिज किया है।









