उत्तर प्रदेश में फर्जी IAS रैकेट का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गोरखपुर (Gorakhpur) पुलिस ने एक धोखेबाज व्यक्ति का खुलासा किया है, जिसने खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर लोगों को ठगा। इस फर्जी अधिकारी ने सरकारी सिस्टम का नकली ढांचा खड़ा कर लाखों-करोड़ों की ठगी की। बिहार (Bihar) के सीतामढ़ी (Sitamarhi) निवासी ललित किशोर पिछले छह महीनों से अपने नकली पहचान के साथ चार राज्यों में अपना नेटवर्क चला रहा था। उसने फर्जी आईडी, झूठी नेमप्लेट और प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर एक प्रभावशाली सिस्टम खड़ा कर लिया था।
फर्जीवाड़े का पूरा जाल और पुलिस का खुलासा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच में पाया कि ललित किशोर ने न केवल फर्जी पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज बनाए थे, बल्कि अपने को अधिक प्रामाणिक दिखाने के लिए भारी-भरकम प्रोटोकॉल भी तैयार किए थे। उसने दस गनमैन, एक स्टेनोग्राफर और लालबत्ती वाली गाड़ियों का इस्तेमाल कर एक प्रभावशाली फर्जी अधिकारी का माहौल बना लिया था। इन सबके बीच, उसने AI (Artificial Intelligence) का भी सहारा लिया, जिससे उसने अधिकारियों की तस्वीरें और सरकारी मीटिंग की फर्जी तस्वीरें बनाईं। इन तस्वीरों का इस्तेमाल सोशल मीडिया, वॉट्सएप, बिल्डर्स और ठेकेदारों को प्रभावित करने के लिए किया जाता था।
नेटवर्क का विस्तार और धोखाधड़ी के तरीके
पुलिस की जांच में पता चला कि ललित किशोर का जाल केवल उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) तक फैला हुआ था। बिहार के पटना (Patna) में एक बड़े ठेकेदार ने पुलिस को शिकायत दी कि उसने सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर 1.70 करोड़ रुपये और दो वाहन ललित को दे दिए। गोरखपुर (Gorakhpur) के एक निजी स्कूल से उसके साथी 55 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए लोगों की संख्या अभी सामने आनी शुरू हुई है, और असली आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।









