दरभंगा की गौरा-बौराम सीट पर राजनीतिक समीकरण बदल गए
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदान से ठीक पहले दरभंगा जिले की गौरा-बौराम विधानसभा सीट पर राजनीतिक माहौल पूरी तरह से बदल गया है। वीआईपी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने अपने ही भाई संतोष सहनी को चुनावी मैदान से हटा दिया है और महागठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अली खान का समर्थन करने का फैसला किया है। इस निर्णय के साथ ही इस सीट पर महागठबंधन की ‘फ्रेंडली फाइट’ समाप्त हो गई है, लेकिन क्या यह जीत का रास्ता सुनिश्चित कर पाएगी, यह अभी अनिश्चित है।
गौरा-बौराम सीट का राजनीतिक संघर्ष और खींचतान
गौरा-बौराम विधानसभा सीट को लेकर महागठबंधन में शुरू से ही विवाद और खींचतान चल रही थी। लालू प्रसाद यादव ने इस सीट के लिए आरजेडी (RJD) से अफजाल अली खान को टिकट दे दिया था, जिन्होंने तुरंत ही अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। हालांकि, सीट शेयरिंग के अंतिम समय में यह सीट मुकेश सहनी के खाते में चली गई, जिन्होंने अपने भाई संतोष सहनी को वीआईपी (VIP) का टिकट दिलाया। मुकेश सहनी जातीय वोटरों के आधार पर इस सीट को अपने लिए सुरक्षित मान रहे थे, लेकिन अफजाल अली खान ने ‘फ्रेंडली फाइट’ को और भी टाइट कर दिया। इस स्थिति में संतोष सहनी की चुनावी राह कठिन हो गई थी, और अंत में वोटिंग से पहले उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा।
सियासी जंग का त्रिकोणीय मुकाबला
दरभंगा की गौरा-बौराम सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। आरजेडी से अफजल अली खान, वीआईपी से संतोष सहनी, बीजेपी से सुजीत कुमार सिंह और एआईएमआईएम (AIMIM) के अख्तर शहंशाह इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 2020 में यह सीट एनडीए (NDA) के कब्जे में थी, जब वीआईपी ने जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार का सीन पूरी तरह से बदला हुआ है। बीजेपी के उम्मीदवार सुजीत कुमार सिंह, जो पूर्व आईआरएस (IRS) अधिकारी हैं, इस बार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। वहीं, मुकेश सहनी ने अपने भाई को मैदान में उतारकर इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। अफजाल अली खान की सक्रियता और मुस्लिम वोटों का समर्थन इस बार मुकाबले को और भी रोमांचक बना रहा है।










