सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर और बिहार में उनकी भूमिका
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने रास्ते बदलते हुए पहले जेडीयू (Janata Dal United) का हिस्सा बने और फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। भले ही सम्राट चौधरी भाजपा के पारंपरिक कार्यकर्ता न रहे हों, लेकिन उन्होंने पार्टी की विचारधारा और कार्यशैली को पूरी निष्ठा से अपनाया। साथ ही, उन्होंने संगठन की गहरी समझ विकसित करने का प्रयास भी किया। यही कारण रहा कि कम समय में ही वे बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंच गए।
बिहार में भाजपा की रणनीति और सम्राट चौधरी का उदय
बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को उस समय पार्टी की कमान सौंपी, जब नीतीश कुमार महागठबंधन (Mahagathbandhan) के साथ थे। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने 2022 में एनडीए (NDA) छोड़कर महागठबंधन का साथ चुना। नीतीश के भाजपा से अलग होने के पीछे उस समय प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और प्रभारी भूपेंद्र यादव की कार्यशैली को जिम्मेदार माना गया। जब नीतीश महागठबंधन में थे, तब ही सम्राट चौधरी को बिहार विधानपरिषद में विरोधी दल का नेता बनाया गया। उन्होंने नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा, लेकिन जनवरी 2024 तक उन्हें समझ में आ गया कि नीतीश कुमार की वापसी एनडीए में हो सकती है। इसी सोच के चलते उन्होंने अपने हमलावर रुख को धीमा कर दिया। अंततः जनवरी 2024 में नीतीश कुमार एनडीए में लौट आए और फिर से बिहार में सरकार बन गई। उस समय सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल किया गया, जिससे उनका कद और भी बढ़ गया।
नीतीश कुमार के साथ सहयोग और मुख्यमंत्री पद की दिशा
सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर वित्त मंत्री का पद संभाला और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। हालांकि, वे नीतीश कुमार से हमेशा कदम से कदम मिलाने का प्रयास करते रहे। नीतीश कुमार की राजनीति को वे भलीभांति समझते थे, और उन्हें पता था कि उनके आगे निकलने की होड़ न केवल गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि उनके अपने राजनीतिक करियर को भी खतरे में डाल सकती है। इसी कारण उन्होंने नीतीश का भरोसा भी जीता। खास बात यह है कि नीतीश कुमार खुद कुर्मी जाति से आते हैं, और उन्होंने कर्मी तथा कोइरी (कुशवाहा) जातियों के गठजोड़ से लालू यादव के वोट बैंक का मुकाबला किया। सम्राट चौधरी को नीतीश की इस जातीय समीकरण में सहजता से देखा गया। यही जातीय समीकरण भाजपा को बिहार में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने का रास्ता बना।










