बिहार में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का बढ़ता रुझान
बिहार के बेगूसराय जिले के मटिहानी प्रखंड में आयोजित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रैली में महिलाओं की भारी उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को नई दिशा दी है। इस रैली में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कहीं अधिक थी, जिनमें से कई अपने बच्चों के साथ भी आई थीं। जीविका दीदियों और महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि महिलाएं अब चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने लगी हैं। जब नीतीश कुमार मंच पर पहुंचे, तो उनके स्वागत में महिलाओं का उत्साह और ऊर्जा साफ झलक रही थी, जो उनके वोटर वर्ग का मजबूत संकेत है।
महिला वोटरों का महत्व और चुनावी रणनीति
उत्तर भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अभी भी सामान्य से बहुत दूर है, लेकिन बिहार में यह तेजी से बढ़ रही है। पिछले चुनाव में महिलाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई थी, खासकर जब सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच महज 12 हजार वोट का अंतर था। सीएसडीएस (Centre for the Study of Developing Societies) की रिपोर्ट के अनुसार 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पुरुषों का समर्थन महागठबंधन को था, जबकि महिलाओं ने अधिकतर एनडीए का समर्थन किया। राज्य में हर 100 मतदाताओं में से 53 पुरुष और 47 महिलाएं हैं, और महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले कई चुनावों से पुरुषों से अधिक रहा है। यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुरुष रोज़गार के कारण अन्य राज्यों और शहरों में पलायन कर चुके हैं।
महिला मतदाताओं का राजनीतिक प्रभाव और सरकार की योजनाएं
महिला मतदाताओं के बीच एनडीए की मामूली बढ़त उसे चुनाव जीताने में मदद कर सकती है। नीतीश कुमार इस बात को भलीभांति समझते हैं और महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। बिहार सरकार ने अब तक 3.6 करोड़ महिलाओं में से 1.21 करोड़ को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता दी है, और आगे दो लाख रुपये तक का वादा भी किया है। विपक्षी महागठबंधन ने भी महिलाओं के लिए माई-बहिन योजना शुरू कर हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है।
महिलाओं की नाराजगी और चुनावी मुद्दे
हालांकि, रैली में पहुंची महिलाओं ने महंगाई और जीवन यापन की कठिनाइयों को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। एक महिला ने कहा कि 10 ग्राम सोने की कीमत अब 1 लाख 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जिससे बेटियों की शादी के लिए सोना खरीदना मुश्किल हो गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की सहायता राशि अभी तक उन्हें नहीं मिली है। बिहार में 94 लाख परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक आय 6 हजार रुपये से भी कम है, और उनके लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि बहुत महत्वपूर्ण है। महिलाओं का यह भी मानना है कि नीतीश कुमार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
महिला मतदाताओं का राजनीतिक जुड़ाव और भविष्य की दिशा
पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार ने महिलाओं के साथ गहरा संबंध स्थापित किया है। उनके भाषणों में अक्सर पंचायत और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण और पुलिस में 35 प्रतिशत आरक्षण की बात होती है। बिहार में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या भी देश में सबसे अधिक है। नीतीश कुमार खुद भी विरोधियों पर तंज कसते हुए कहते हैं कि उनके शासन में महिलाओं को स्वतंत्रता और सुरक्षा मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का यह राजनीतिक जुड़ाव बिहार की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अब देखना है कि 2025 के बिहार चुनाव में महिलाओं का वोटर वर्ग किस तरह का प्रभाव डालता है।











