बिहार में छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का विस्तृत विवरण
बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया। इसके बजाय, सरकार का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे, खासकर जब भीड़ हिंसक हो गई थी।
सीवान में AK-47 से फायरिंग का मामला और सरकार की सफाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीवान में एक पुलिसकर्मी ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए AK-47 राइफल से हवा में चार गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सरकार ने यह भी माना कि इस तरह के हथियार का प्रयोग सामान्य स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए। इसे विशेष अभियानों के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है, और इस घटना में किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची। इस कांस्टेबल को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
फायरिंग, गिरफ्तारी और हिंसा की विस्तृत रिपोर्ट
बिहार सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल से दो राउंड फायर किए, जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। सरकार का दावा है कि ये घायल प्रदर्शनकारी AK-47 से गोली नहीं लगी और वे उस स्थान पर मौजूद नहीं थे जहां फायरिंग हुई। इस घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, ताकि हथियार और फायरिंग की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
वहीं, सरकार के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में प्रदर्शन से जुड़ी कुल 69 एफआईआर दर्ज हुईं और लगभग 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के माध्यम से छोड़ा गया।
प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा भड़क गई, जिसमें छपरा, पटना, जहानाबाद, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान जैसे शहर शामिल हैं। खासतौर पर छपरा में 25 जुलाई को प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल हो गए और तोड़फोड़ तथा पथराव की घटनाएं हुईं।
हिंसा में कुल 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए हैं। इनमें दो बीडीओ, तीन पुलिस इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल शामिल हैं। एक बीडीओ की आंख की रोशनी चली गई, जबकि दूसरे बीडीओ को सिर पर गंभीर चोट आई है। सरकार ने माना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का प्रयोग किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं।
सरकार ने यह भी बताया कि हिंसा के दौरान AISA और RYA जैसे संगठनों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था, जबकि 24 जुलाई को CJP (Chief Justice of India) की ओर से किए गए प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं पड़ा। साथ ही, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा रहा है, ताकि उनकी पहचान सुरक्षित रहे।











