बिहार में राज्यसभा चुनाव की तेज हो रही हलचल
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इन सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित की गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने दो उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिनमें नितिन नवीन और शिवेश कुमार शामिल हैं। अब सहयोगी दल जेडीयू को अपने दो उम्मीदवारों के नाम तय करने हैं। एनडीए (NDA) के पक्ष में चार सीटों पर स्थिति लगभग स्पष्ट मानी जा रही है।
राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों की स्थिति और राजनीतिक समीकरण
बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवारों का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि पांचवीं सीट को लेकर अभी पेच फंसा हुआ है। इस सीट के लिए एनडीए ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (Rashtriya Lok Manch) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन विधायकों की संख्या को देखते हुए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर महागठबंधन ने भी इस सीट के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है।
राज्यसभा चुनाव में मुख्य दलों की रणनीति और समीकरण
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। इसके लिए आरजेडी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से समर्थन मांगा है। यदि AIMIM के छह विधायकों का समर्थन मिल जाता है, तो आरजेडी का उम्मीदवार जीतने की संभावना बढ़ जाएगी। बिहार में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जिनमें बीजेपी के 89, जेडीयू के 85, एलजेपीआर के 19, हम के 5 और आरएलएम के 4 विधायक शामिल हैं। वहीं महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जिनमें आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6, माले के 2, आईआईपी के 1 और माकपा के 1 विधायक हैं। इस तरह एनडीए को तीन अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए, जबकि महागठबंधन को छह विधायकों का समर्थन चाहिए। इस स्थिति में बीजेपी कांग्रेस और बीएसपी (Bahujan Samaj Party) के विधायकों पर नजरें गड़ाए हुए है, वहीं आरजेडी AIMIM के समर्थन के भरोसे जीत की उम्मीद कर रही है। इस कारण बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।









