बिहार के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर सवाल
बिहार के सरकारी स्कूलों की वर्तमान स्थिति कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। एक ओर तो कई स्कूल भवन ही नहीं हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई का अवसर नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी ओर, कुछ स्कूलों में नई-नई इमारतें तो खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन उनमें पढ़ाई शुरू होने से पहले ही ताले लग चुके हैं। कई जगहों पर बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रास्ता नहीं मिल रहा है, और कहीं-कहीं तो उन्हें जान जोखिम में डालकर नेशनल हाईवे पार करना पड़ता है। कुछ स्कूल भवन वर्षों से बंद पड़े हैं, तो कुछ पर बुलडोजर चल चुका है। इन पांच जिलों की रिपोर्ट ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है, जो बिहार की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
सुपौल, बेगूसराय, मुंगेर, वैशाली और सीतामढ़ी की हकीकत
सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड में स्थित सिमराही बाजार का मॉडल स्कूल, जो करीब सात-आठ साल पहले बनकर तैयार हुआ था, आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस भवन का उपयोग कभी नहीं हुआ, और अब यह जंगल और झाड़ियों से घिर चुका है। खिड़कियां और दरवाजे चोरी हो चुके हैं, बिजली के तार और जरूरी सामान गायब हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण यह नया स्कूल खंडहर बन गया है। वहीं, बेगूसराय के किरतौल में करीब पंद्रह लाख रुपये की लागत से बने स्कूल का उद्घाटन तो हुआ, लेकिन रास्ते की अनुपस्थिति में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। स्कूल मुख्य सड़क से दूर खेतों के बीच है, और वहां पहुंचने का कोई पक्का रास्ता नहीं है।
मुंगेर जिले में भी एक शानदार दो मंजिला स्कूल भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन एक साल से ताला लगा है। रास्ते की समस्या और बिजली की व्यवस्था न होने के कारण यह भवन भी उपयोग में नहीं आ सका। वहीं, वैशाली जिले के वारिसपुर में ग्यारह साल से बंद पड़ा राजकीय आदर्श विद्यालय है, जहां बच्चों को सुरक्षित पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। तेज रफ्तार वाहनों के कारण अभिभावक बच्चों को हाईवे पार करने से डरते हैं, इसलिए वे पुराने स्कूल में ही पढ़ाई कर रहे हैं।
सीतामढ़ी के रिंग बांध इलाके में करीब चालीस लाख रुपये खर्च कर बना नया भवन सड़क चौड़ीकरण के कारण तोड़ दिया गया। इस तरह की घटनाएं बिहार के शिक्षा तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं, जहां न तो स्कूल भवनों की सही योजना बनाई जाती है और न ही बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है।
बिहार सरकार का प्रयास और चुनौतियां
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विभाग ने हाल ही में एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया था। इस शिविर में अधिकारियों को इक्कीस बिंदुओं का टास्क सौंपा गया, जिनमें स्कूलों का बुनियादी ढांचा, गुणवत्ता शिक्षा और अनुशासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। मंत्री का कहना है कि जिन स्कूल भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक हैंडओवर नहीं हुआ है, उन्हें अगले एक महीने में कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। बिहार में इन जटिलताओं को दूर करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।










