बिहार विधानसभा के शपथ ग्रहण में विधायक की असमर्थता
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन जदयू विधायक विभा देवी शपथ पत्र पढ़ने में असमर्थ रहीं। इस दौरान वह बार-बार अटक गईं और टूटे-फूटे शब्दों में शपथ लेने का प्रयास किया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने बीच में दूसरी विधायक से मदद भी ली।
विभा देवी ने शपथ पत्र पढ़ते समय कहा, “सतत लेती हूं… विधी रखती हूं,” लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपने भाषण को पूरा कर सकीं। अंत में उन्होंने प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव के सामने शपथ ली।
राजनीति में वंशवाद और प्रभावशाली परिवारों का वर्चस्व
विभा देवी की राजनीति का सफर किसी विचार, सामाजिक कार्य या लोकतांत्रिक संघर्ष से नहीं बल्कि उनके पति और बाहुबली छवि वाले नेता राजबल्लभ यादव के प्रभाव से शुरू हुआ। जेल जा चुके राजबल्लभ यादव की राजनीतिक पकड़ ने ही उन्हें टिकट से लेकर विधानसभा तक पहुंचाया।
यह व्यवस्था आज भारतीय राजनीति को कमजोर कर रही है, जहां सिद्धांत, शिक्षा और योग्यता के बजाय वंशवाद, जातीय समीकरण और धनबल ही तय करते हैं कि कौन विधायक बनेगा। जब कोई प्रतिनिधि शपथ भी ठीक से नहीं पढ़ पाता, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है। इससे पता चलता है कि जनता का वोट किस आधार पर पड़ रहा है। जब समाज शिक्षा या नीति के बजाय जात-पात, दबाव या भय को प्राथमिकता देता है, तो ऐसी ही घटनाएं विधानसभा में देखने को मिलती हैं।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब जनता अपने प्रतिनिधियों की योग्यता और जिम्मेदारी को गंभीरता से लेगी।
‘रानी भारती’ मोमेंट का अर्थ और प्रभाव
वेब सीरीज़ “महारानी” में ‘रानी भारती मोमेंट’ उस पल को कहा जाता है जब एक सामान्य, अशिक्षित और घरेलू जीवन जीने वाली महिला रानी भारती को अचानक बिहार की मुख्यमंत्री बना दिया जाता है। यह दृश्य इसलिए खास बन जाता है क्योंकि जब वह पहली बार विधानसभा में शपथ लेने पहुंचती हैं, तो माहौल उनके लिए नया और भारी होता है।
शपथ पत्र पढ़ते समय उनकी झिझक स्पष्ट दिखाई देती है-वह शब्दों को तोड़-तोड़कर बोलती हैं, कई बार रुक जाती हैं, और यह पूरा दृश्य उनकी असहजता और घबराहट को बहुत ही वास्तविकता के साथ दर्शाता है।
दर्शकों ने इस सीन को बहुत प्रभावशाली माना, क्योंकि यह एक ऐसे किरदार की मासूमियत और अनभिज्ञता को दिखाता है जिसे अचानक सत्ता की ऊंची कुर्सी पर बिठा दिया गया हो। इसी झिझक और अनुभवहीनता के कारण उस समय मीडिया और विरोधियों ने रानी भारती का मज़ाक उड़ाया और उन्हें ‘रबर-स्टैंप सीएम’ कहकर निशाना बनाया।











