बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव की राजनीति हर दिन नई करवट ले रही है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर अब राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को धार दी है। जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने इस बार पहली बार इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे सियासी माहौल में हलचल मच गई है। वहीं, आरजेडी ने अपनी पुरानी रणनीति को दोहराते हुए रेखा गुप्ता को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इस चुनाव का परिणाम न केवल वोट बिखराव को प्रभावित करेगा, बल्कि एनडीए की राह भी आसान या कठिन बना सकता है।
बांकीपुर का जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण ही इस सीट पर जीत का मुख्य आधार माना जाता है। यहां पर करीब तीन लाख अस्सी हजार मतदाता हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या कायस्थ समुदाय की है। लगभग 14 प्रतिशत कायस्थ वोटर इस क्षेत्र में हैं, जो चुनाव का निर्णायक फैक्टर साबित हो सकते हैं। इसके बाद यादव, मुस्लिम, वैश्य, दलित, भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत जैसे समुदायों का वोट बैंक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खास बात यह है कि कायस्थ वोटर पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत आधार रहे हैं, लेकिन इस बार समीकरण बदलने की संभावना नजर आ रही है।
राजनीतिक दांव-पेंच और चुनावी समीकरण का प्रभाव
बांकीपुर में आरजेडी ने वैश्य समाज की रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाकर नया समीकरण खड़ा कर दिया है। इससे बीजेपी के कोर वोटबैंक के छिटकने का खतरा बढ़ गया है। यदि वैश्य समाज इस बार आरजेडी के पक्ष में मतदान करता है, तो बीजेपी को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। प्रशांत किशोर की रणनीति भी इस समीकरण को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वह सवर्ण और अतिपिछड़े समाज के वोट बैंक पर भरोसा कर रहे हैं। इस चुनाव में मुस्लिम, यादव और दलित वोटर भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।









