मोकामा विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह की गिरफ्तारी का प्रभाव
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में जेडीयू के प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने अभी तक इस मामले में कुल 81 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनमें हत्या से जुड़े अन्य आरोपी और अनंत सिंह के समर्थक भी शामिल हैं। इस गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह को फिर से जेल में रहकर ही चुनाव लड़ना पड़ेगा।
चुनावी मुकाबला और सियासी समीकरण
मोकामा सीट पर अनंत सिंह का मुकाबला आरजेडी की उम्मीदवार वीणा देवी से है, जो बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। वहीं, जन सुराज पार्टी के पीयूष प्रियदर्शी भी इस चुनाव में भाग ले रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह जेल में रहते हुए भी जीत हासिल कर चुके हैं, लेकिन अब दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में जेल जाना उनके लिए चुनावी चुनौती बन गया है। दस साल बाद फिर से जेल में रहकर चुनाव लड़ना उनके लिए एक बड़ा सियासी संकट है।
सामाजिक और जातीय राजनीति का असर
दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार की जातीय राजनीति को फिर से गरमाया है। यादव और ओबीसी समुदाय के वोटर इस घटना के बाद अनंत सिंह के समर्थन में लामबंद हो सकते हैं, जिससे उनके चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। वहीं, भूमिहार समाज से आने वाले अनंत सिंह की मजबूत पकड़ उनके समर्थकों में बनी हुई है, जबकि सूरजभान सिंह भी भूमिहार हैं और उनकी पत्नी आरजेडी से हैं। इस स्थिति में वोटों का बंटवारा होने की संभावना भी बनी हुई है।
मोकामा की चुनावी जंग का वर्तमान परिदृश्य
मोकामा क्षेत्र में कुल 2,84,108 मतदाता हैं, जिनमें भूमिहार, यादव, राजपूत, ओबीसी और दलित समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। भूमिहार वोट लगभग 30 प्रतिशत से अधिक हैं, जबकि यादव लगभग 20 प्रतिशत हैं। इसके अलावा, राजपूत, कुर्मी, कोइरी और दलित समुदाय भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार का चुनाव अनंत सिंह के लिए खासा कठिन माना जा रहा है, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी ने सियासी समीकरणों को बदलकर नए रंग दे दिए हैं।
वोट बैंक और चुनावी रणनीति
भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत वोटर अनंत सिंह के साथ हैं, और वे बीजेपी के समर्थन से एकजुट हो सकते हैं। वहीं, ओबीसी और दलित वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए सियासी दांव-पेंच चल रहे हैं। दुलारचंद यादव की हत्या के बाद यादव वोटर भी आरजेडी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं, जिससे वीणा देवी को फायदा हो सकता है। इस घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में नई जटिलताएं खड़ी कर दी हैं, जिनका असर आगामी चुनाव पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।











