छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा पर नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिसकर्मी
छत्तीसगढ़ और MP (Madhya Pradesh) की सीमा पर हुई नक्सली मुठभेड़ में मध्य प्रदेश के एक पुलिस इंस्पेक्टर शहीद हो गए। यह घटना तब हुई जब हॉकफोर्स की बालाघाट यूनिट के जवान नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रहे थे। इस मुठभेड़ में इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, जो बालाघाट के बोहानी गांव से थे, गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत ही छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ एयरलिफ्ट किया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। यह घटना सुरक्षा बलों की सतर्कता और साहस का परिचायक है, जो नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं।
शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का जीवन और वीरता
29 वर्षीय शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का जन्म देवेंद्र शर्मा और शर्मिला शर्मा के घर हुआ था। उनके पिता किसान हैं और माता गृहिणी हैं। छोटे भाई अंकित शर्मा पढ़ाई कर रहे हैं। आशीष ने 2016 में SAF (Special Armed Force) में उप निरीक्षक के रूप में भर्ती हुए थे। 2018 में वह हॉकफोर्स में शामिल हुए और नक्सलियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन किए। वर्ष 2022 में, उन्हें इनामी नक्सली रूपेश उर्फ हुंगा का एनकाउंटर करने पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, 2023 में उन्होंने महिला नक्सलियों सरिता और सुनीता को भी मारा था। इसी वर्ष फरवरी में, तीन महिला नक्सलियों को मार गिराने के बाद उन्हें ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया।
सरकार का समर्थन और शोकाकुल परिवार
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहीद आशीष शर्मा की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी और सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इस दुखद घड़ी में उनके परिवार के साथ हैं।” सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि शहीद जवान के छोटे भाई को सरकारी सेवा में भर्ती किया जाएगा। इस घटना के बाद, पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है, और जवानों ने अपने वीर साथी को श्रद्धांजलि दी है। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहे अभियान को कोई नहीं रोक सकता।











