सहारनपुर के मेडिकल अस्पताल में डॉक्टर बाबर का स्पष्ट बयान
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित प्रसिद्ध मेडिकेयर अस्पताल के डॉक्टर बाबर ने बुधवार को उन अफवाहों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्हें उनके सहकर्मी डॉ. आदिल अहमद की गिरफ्तारी के बाद हिरासत में लिया गया है। डॉ. आदिल पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से संबंध होने का आरोप है।
डॉ. बाबर ने कहा, “मैं पूरी तरह से अस्पताल में मौजूद हूं और किसी से भी मिलने के लिए उपलब्ध हूं। जांच एजेंसियों के साथ मैं पूरी तरह सहयोग कर रहा हूं, लेकिन लोगों को झूठी खबरें फैलाना बंद करना चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पिछले तीन वर्षों से अस्पताल में कार्यरत हैं, जबकि डॉ. आदिल मार्च में ही यहां आए थे।
डॉ. बाबर का कहना है कि वे पहली बार ही मिले थे
डॉ. बाबर ने बताया, “मैं उनसे पहली बार तभी मिला जब वे अस्पताल में काम करने आए। इससे पहले मैं उन्हें नहीं जानता था। उनका व्यवहार हमेशा शालीन और पेशेवर रहा है, और न ही मरीजों या स्टाफ से कभी कोई शिकायत मिली है।” उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. आदिल की शादी में वे चार लोग ही शामिल हुए थे, और यह कोई आतंकी गतिविधि नहीं थी।
आदिल की शादी और पारिवारिक जीवन का खुलासा
डॉ. बाबर ने बताया कि आदिल ने अपनी शादी की खरीदारी सहारनपुर से ही की थी और कई बार अस्पताल में भी सामान लाया था। उन्होंने कहा, “हम शादी से दो दिन पहले कश्मीर घूमने गए थे। बारात के दिन हम जुलूस में शामिल नहीं हुए क्योंकि केवल चार लोगों को ही अनुमति थी।” उन्होंने यह भी बताया कि आदिल की पत्नी भी एमडी डॉक्टर हैं।
डॉ. बाबर ने यह भी कहा कि आखिरी बार वे आदिल से उसकी गिरफ्तारी के दिन ही मिले थे। उन्होंने कहा, “आदिल अपने पेशे में बहुत कुशल था। उसकी बीमारी की पहचान और इलाज उत्कृष्ट था, और मरीज हमेशा संतुष्ट होकर लौटते थे।” उन्होंने यह भी बताया कि आदिल ने अपनी मां की बीमारी के कारण कुछ दिनों के लिए घर जाने की बात कही थी।
आदिल की जीवनशैली और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग
डॉ. बाबर ने कहा कि आदिल कभी लैपटॉप का इस्तेमाल नहीं करता था और अस्पताल के दौरान बहुत कम फोन पर बात करता था। उन्होंने कहा, “मैं दो-तीन बार उसके घर और नर्सिंग होम गया, लेकिन उसके जीवनशैली या कामकाज में कोई ऐसा संकेत नहीं मिला जिससे लगे कि वह देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकता है।” उन्होंने पुष्टि की कि यूपी एसटीएफ (UP STF) और अन्य जांच एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की है और वे पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं।
आदिल की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग निवासी डॉ. आदिल अहमद को 7 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने स्थानीय पुलिस और विशेष अभियान समूह (SOG) की मदद से गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि वह पिछले छह महीनों से सहारनपुर के एक प्रसिद्ध अस्पताल में कार्यरत था। इससे पहले वह शहर के एक अन्य निजी अस्पताल में काम कर चुका था।
आदिल अंबाला रोड (Ambala Road) स्थित बापू विहार कॉलोनी (Bapu Vihar Colony) में किराए के मकान में रहता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह शांत स्वभाव का व्यक्ति था, हालांकि रात में उसके घर के आसपास कई लोग आते-जाते थे और बाहर कई गाड़ियां खड़ी रहती थीं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 28 अक्टूबर को श्रीनगर (Srinagar) में एक मामला दर्ज किया था, जब जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) समर्थक पोस्टर कई इलाकों में दिखाई दिए थे। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर आदिल को पोस्टर लगाते हुए दिखाया गया, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई। उसे सहारनपुर में फेमस अस्पताल से हिरासत में लिया गया और श्रीनगर पुलिस को ट्रांजिट रिमांड पर सौंप दिया गया।
अस्पताल ने उसकी सेवा समाप्त कर दी और उसका नाम हटा दिया गया है। अस्पताल प्रबंधक डॉ. मनोज मिश्रा ने कहा, “आदिल हमेशा विनम्र और पेशेवर था। उसके व्यवहार में कभी कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं दिखी।”
दिल्ली धमाके में हुई मौतें और आतंकवाद का संदर्भ
10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले (Red Fort) के पास एक भीषण विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई जब हरियाणा के फरीदाबाद (Faridabad) में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और अंसार गजवात-उल-हिंद (Ansar Gajwat-ul-Hind) से जुड़े कथित ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ किया गया था।









