दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के बावजूद हवा की गुणवत्ता क्यों नहीं सुधर रही?
दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण यानी ग्रेप-2 लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत सड़क पर पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक और डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध जैसे कठोर कदम उठाए गए हैं। बावजूद इसके, सवाल उठता है कि इन प्रयासों के बावजूद वायु गुणवत्ता में सुधार क्यों नहीं हो रहा है?
ग्रेप-2 के नियमों का उल्लंघन और प्रदूषण का बढ़ना
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, डीडीयू मार्ग पर ग्रेप-2 के नियमों का खुलेआम उल्लंघन देखा गया है। यहां निर्माण स्थल पर न तो ग्रीन कर्टन लगाए गए थे और न ही कंस्ट्रक्शन मटेरियल को ढका गया था। धूल उड़ती रही और काम बिना किसी रुकावट के चलता रहा। यह स्थिति उस समय की है जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर पीएम 2.5 में 369 तक पहुंच चुका था, जो बहुत ही खतरनाक माना जाता है।
प्रदूषण को रोकने के उपाय और वर्तमान स्थिति
जब टीम राजघाट के पास बन रहे DDA सदभावना पार्क पहुंची, तो वहां भी निर्माण कार्य पूरी गति से जारी था। साइट पर पड़े सीमेंट और रेत जैसे मटेरियल खुले में बिखरे हुए थे, और न तो पानी का छिड़काव किया जा रहा था और न ही हरियाली का कोई संकेत दिख रहा था। इस तरह की अनदेखी से प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाती और नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता, तब तक वायु प्रदूषण में कमी नहीं आएगी। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा है कि जहां भी ग्रैप-2 का उल्लंघन हो रहा है, उन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और जनता से भी सहयोग की अपील की गई है।











