मध्य प्रदेश में बिजली वितरण नीति में बदलाव का विवाद
मध्य प्रदेश में रबी फसलों की तैयारी कर रहे किसानों को अधिकतम 10 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति पर कर्मचारियों की वेतन कटौती का आदेश जारी किया गया था, जिसे सरकार ने तुरंत ही रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद बिजली कंपनी के मुख्य जनरल मैनेजर (CGM) अजय कुमार जैन को उनके पद से हटा दिया गया है।
यह विवादित आदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPEVDCL) द्वारा जारी किया गया था, जिसे कांग्रेस ने किसान विरोधी करार देते हुए कड़ा विरोध जताया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में हस्तक्षेप कर आदेश को निरस्त करने के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया।
आदेश का मुख्य बिंदु और सरकार की प्रतिक्रिया
आदेश के अनुसार, यदि किसी माह में किसी कृषि फीडर पर एक दिन में 10 घंटे से अधिक बिजली दी जाती है, तो संबंधित ऑपरेटर का एक दिन का वेतन काटा जाएगा। इसके अलावा, लगातार दो दिनों तक यह स्थिति बनी रहने पर जूनियर इंजीनियर का वेतन काटा जाएगा। यदि यह क्रम पांच दिनों तक चलता है, तो उप महाप्रबंधक का वेतन भी कटौती के दायरे में आएगा। सात दिनों तक यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो महाप्रबंधक का वेतन भी काटा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस आदेश को पूरी तरह से वापस लेते हुए कहा कि सरकार ने इस विवादित नीति को निरस्त कर दिया है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना है कि यह कदम किसानों और कर्मचारियों दोनों के हित में है और बिजली की आपूर्ति में सुधार करेगा।
कांग्रेस और विपक्ष का विरोध
कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस आदेश का तीव्र विरोध किया और इसे किसान और कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश में बिजली की कमी का संकेत है और सरकार से इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि इस नीति से किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाएगी, जो कृषि क्षेत्र के लिए नुकसानदायक है।










